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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर उछाल

 9 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का सीधा असर अब देश के आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। तेल कंपनियों ने आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी […]

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  • May 23, 2026 7:56 am IST, Published 23 minutes ago

 9 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का सीधा असर अब देश के आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। तेल कंपनियों ने आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में पेट्रोल के दाम ₹99.51 और डीजल के दाम ₹92.49 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।

9 दिन में तीसरी बार बड़ा झटका

ईंधन की कीमतों में लगातार हो रहा यह इजाफा आम उपभोक्ताओं के लिए कमर तोड़ देने वाला साबित हो रहा है। पिछले 9 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है:

  • आज: पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ।

  • 4 दिन पहले (19 मई): दोनों ईंधनों की कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

  • 15 मई: मिडिल ईस्ट संकट के बाद करीब चार साल में पहली बार कीमतों में एकमुश्त ₹3 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया था।

महंगाई की चौतरफा मार: इन चीजों पर पड़ेगा सीधा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी अर्थव्यवस्था पर ‘डोमिनो इफेक्ट’ (एक के बाद एक असर) डालेगा।

प्रभावित क्षेत्र संभावित असर और वजह
सब्जियां, फल और राशन ट्रक और टेम्पो का मालभाड़ा बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली जरूरी खाद्य सामग्रियां महंगी हो जाएंगी।
खेती की लागत किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए अब ज्यादा डीजल फूंकना होगा, जिससे अनाज उत्पादन की लागत बढ़ेगी।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट डीजल महंगा होने से सार्वजनिक बसों, स्कूल बसों और ऑटो-कैब के किराए में बढ़ोतरी होना लगभग तय है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?

कच्चे तेल (Crude Oil) का गणित: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल सप्लाई बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल उफान पर है। संकट शुरू होने से पहले जो क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब 100 से 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है।

लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के बाद, भारतीय तेल विपणन कंपनियां (OMCs) भारी घाटे (Under-recoveries) से जूझ रही थीं। इस घाटे की भरपाई और वैश्विक दबाव को कम करने के लिए कंपनियों को कीमतों में यह staggered (किस्तों में) बढ़ोतरी का कदम उठाना पड़ा है।

आगे का अनुमान: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक ऐसे ही बना रहा और कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल की तरफ बढ़ीं, तो आने वाले दिनों में रिटेल मार्केट में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बड़े उछाल देखने को मिल सकते हैं।

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