नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में गहराते जल संकट के बीच एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। एक तरफ जहां देश के प्रमुख 166 जलाशयों में पानी का स्तर घटकर महज 33% रह गया है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक लापरवाही और जर्जर सिस्टम के कारण महानगरों में 25 से 60 फीसदी तक पीने का साफ पानी बर्बाद हो रहा है। यह बर्बादी मुख्य रूप से पाइपलाइनों में लीकेज और अवैध कनेक्शनों (पानी चोरी) के कारण हो रही है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को रोजाना लगभग 3,850 मिलियन लीटर (MLD) पानी की सप्लाई की जाती है। इस सप्लाई का करीब 30% हिस्सा यानी 1,000 MLD पानी हर दिन लीकेज के कारण नालियों में बह जाता है। हैरानी की बात यह है कि मुंबई में रोज जितना पानी बर्बाद होता है, उतने पानी में मध्य प्रदेश के दो बड़े शहरों—इंदौर और भोपाल (संयुक्त जरूरत 900 MLD)—की दैनिक जलापूर्ति आसानी से की जा सकती है।
शहरी निकायों ने पानी की इस बर्बादी और चोरी (नॉन रिवेन्यू वाटर) को 20% से नीचे लाने के लिए साल 2016 में स्मार्ट सिटी और अमृत 2.0 योजनाओं के तहत एससीएडीए (SCADA) प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी।
बजट की बर्बादी: पिछले 10 वर्षों में इस सिस्टम पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये फूंक दिए गए, लेकिन जमीन पर नतीजे सिफर रहे।
दावे बनाम हकीकत: भोपाल नगर निगम ने साल 2021 तक लीकेज को 16% पर लाने का दावा किया था, लेकिन कैग (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार वहां 48% पानी बर्बाद हो रहा है। वहीं, इंदौर में तो स्थिति और भी बदतर है, जहाँ कुल सप्लाई का 65% पानी जनता तक पहुँचने से पहले ही बह जाता है।
विभिन्न सरकारी और पर्यावरण रिपोर्टों (अमृत 2.0, कैग, यूएन हैबिटेट) के अनुसार, पानी की इस बर्बादी से हर साल टैक्सपेयर्स के अरबों रुपये पानी में बह रहे हैं:
| शहर | सालाना/मासिक खर्च की स्थिति | लीकेज का प्रतिशत | अनुमानित वित्तीय नुकसान |
| इंदौर | जलूद से पानी लाने में ₹29 प्रति हजार लीटर खर्च (₹25 करोड़/माह बिजली बिल) | 65% | लगभग ₹15 करोड़ महीना नुकसान |
| मुंबई | जलापूर्ति पर कुल ₹16,092 करोड़ का खर्च | 30% | करीब ₹4,500 करोड़ की बर्बादी |
| बेंगलुरु | सालाना ₹10,000 करोड़ का बजट | 35% | करीब ₹3,500 करोड़ का नुकसान |
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों के मौसम में शहरों में पानी की मांग सामान्य (135 लीटर प्रति व्यक्ति) से बढ़कर 200 लीटर प्रति व्यक्ति तक पहुंच जाती है। देश में शहरीकरण बढ़ने से पानी की कुल मांग में 48% का इजाफा हुआ है। ऐसे समय में जब देश की लगभग 60 करोड़ आबादी पानी की किल्लत का सामना कर रही है, सिस्टम की यह लापरवाही आने वाले समय में बड़े जल संकट का इशारा कर रही है। यदि समय रहते लीकेज और पानी चोरी पर लगाम नहीं कसी गई, तो अरबों के बजट के बाद भी देश के शहर बूंद-बूंद को तरस जाएंगे।