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डाबर के सिलवासा प्लांट पर USFDA की सख्त टिप्पणी, गुणवत्ता जांच पर सवाल

नई दिल्ली : भारत की प्रमुख आयुर्वेदिक और एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) द्वारा की गई जांच में कंपनी के सिलवासा स्थित विनिर्माण संयंत्र को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में डेटा इंटीग्रिटी, उत्पादन प्रक्रिया, स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण से […]

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  • June 7, 2026 3:00 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली : भारत की प्रमुख आयुर्वेदिक और एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) द्वारा की गई जांच में कंपनी के सिलवासा स्थित विनिर्माण संयंत्र को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में डेटा इंटीग्रिटी, उत्पादन प्रक्रिया, स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी खामियों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद निवेशकों और बाजार की निगाहें कंपनी पर टिक गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, USFDA ने जनवरी में किए गए निरीक्षण के दौरान संयंत्र में कई ऐसी कमियां पाईं जो उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। निरीक्षण के दौरान कच्चे माल के गोदाम में पक्षियों की मौजूदगी और पक्षियों की बीट मिलने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पैकेजिंग सामग्री के नजदीक पक्षियों की गतिविधियां देखी गईं, जिससे संदूषण (कंटैमिनेशन) का खतरा बढ़ सकता है।

USFDA की रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ विनिर्माण रिकॉर्ड में गड़बड़ियां पाई गईं। जांचकर्ताओं का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए तैयार किए गए प्रतीत हुए। इसके अलावा, उत्पादन उपकरणों के उपयोग और रखरखाव से संबंधित प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मशीनों का उपयोग विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया गया, लेकिन उससे जुड़े दस्तावेजों और नियंत्रण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं मिली।

निरीक्षण के दौरान माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षणों की विश्वसनीयता पर भी चिंता व्यक्त की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रयोगशाला रिकॉर्ड और वास्तविक परिस्थितियों में अंतर पाया गया। कुछ नमूनों में संदूषण के संकेत मिलने के बावजूद परीक्षण परिणामों को मानक सीमा के भीतर बताया गया, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े हुए हैं।

हालांकि, डाबर इंडिया ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि कंपनी नियामकीय मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी का कहना है कि निरीक्षण के दौरान जिन बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। डाबर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्र को अलग कर दिया गया है और अंतिम उत्पादों की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि सभी उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं।

इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद डाबर के शेयरों में हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। निवेशकों ने कंपनी के स्पष्टीकरण और आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए रखी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी समय रहते सभी सुधारात्मक कदम लागू कर देती है, तो इस मामले का दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रह सकता है।

गौरतलब है कि डाबर भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित उपभोक्ता उत्पाद कंपनियों में से एक है, जो आयुर्वेदिक दवाओं, स्वास्थ्य उत्पादों, पर्सनल केयर और खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में कार्यरत है। कंपनी के उत्पाद भारत के साथ-साथ अमेरिका सहित कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। ऐसे में USFDA की टिप्पणियां कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं और आने वाले दिनों में डाबर द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर उद्योग जगत की नजर बनी रहेगी।

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