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रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल शॉप क्यों नहीं होती? जानिए इसके पीछे की वजह

नई दिल्ली : भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है। हर दिन लाखों यात्री रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के माध्यम से यात्रा करते हैं। रेलवे स्टेशनों पर खाने-पीने की वस्तुओं, किताबों, दैनिक उपयोग के सामान और अन्य सुविधाओं की दुकानें आसानी से मिल जाती हैं। हालांकि, अधिकांश यात्रियों ने यह जरूर महसूस किया होगा […]

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  • June 7, 2026 3:30 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली : भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है। हर दिन लाखों यात्री रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के माध्यम से यात्रा करते हैं। रेलवे स्टेशनों पर खाने-पीने की वस्तुओं, किताबों, दैनिक उपयोग के सामान और अन्य सुविधाओं की दुकानें आसानी से मिल जाती हैं। हालांकि, अधिकांश यात्रियों ने यह जरूर महसूस किया होगा कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर मेडिकल स्टोर या दवाइयों की दुकानें बहुत कम दिखाई देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल शॉप क्यों नहीं होती?

रेलवे के पुराने नियमों के अनुसार, स्टेशन परिसरों में अन्य दुकानों की तरह मेडिकल स्टोर के लिए भी जगह आवंटित की जाती थी। रेलवे बोर्ड द्वारा वर्ष 2001 में जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया था कि जिन रेलवे स्टेशनों पर डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध है, वहां केमिस्ट स्टॉल के लिए अधिकतम 108 वर्ग फुट तक की जगह पर्याप्त मानी जाएगी। इसके अलावा यदि किसी बुक स्टॉल या अन्य दुकान के भीतर छोटा मेडिसिन कॉर्नर बनाया जाता था, तो उस पर भी अलग से स्थान संबंधी शर्तें लागू नहीं होती थीं।

समय के साथ रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती गई। इसके चलते प्लेटफॉर्म पर जगह की कमी और भीड़भाड़ की समस्या सामने आने लगी। रेलवे प्रशासन ने पाया कि अलग-अलग प्रकार की कई छोटी दुकानों के कारण यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होती है और प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध स्थान का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने अपनी व्यावसायिक नीति में बदलाव किया। नए नियमों के तहत अलग से मेडिकल स्टोर खोलने की व्यवस्था को सीमित कर दिया गया और उसकी जगह मल्टी पर्पज स्टॉल (MPS) की अवधारणा लागू की गई। इन स्टॉलों में यात्रियों की दैनिक जरूरतों का अधिकांश सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाता है। इनमें कई सामान्य दवाइयां भी रखी जा सकती हैं, जिन्हें डॉक्टर की पर्ची के बिना बेचा जा सकता है।

रेलवे का मानना है कि मल्टी पर्पज स्टॉल के माध्यम से कम जगह में अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम होती है और यात्रियों को आवश्यक वस्तुएं एक ही स्थान पर मिल जाती हैं। यही कारण है कि अब नए रेलवे स्टेशनों पर अलग से मेडिकल शॉप के लिए जगह आवंटित नहीं की जाती।

हालांकि, रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। कई बड़े स्टेशनों पर स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन द्वारा कुछ प्रमुख स्टेशनों पर जन औषधि केंद्र स्थापित करने की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध हो सकें।

वर्तमान में देश के कुछ चुनिंदा बड़े रेलवे स्टेशनों पर ही अलग मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं, जबकि अधिकांश स्थानों पर दवाइयों की उपलब्धता मल्टी पर्पज स्टॉल या स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन पर अन्य दुकानों की तुलना में मेडिकल शॉप कम दिखाई देती हैं। रेलवे की यह नीति प्लेटफॉर्म पर स्थान का बेहतर उपयोग करने और यात्रियों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की गई है।

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