नई दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने राजधानी की सड़कों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी के तहत सोमवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) और स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट-एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के अंतर्गत दिल्ली की शहरी सड़कों के सौंदर्यीकरण, वैज्ञानिक पुनर्रचना और हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क फॉर पेविंग ऐंड ग्रीनिंग ऑफ अर्बन रोड’ लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह, पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा सहित सीएसआईआर-सीआरआरआई के वैज्ञानिक, एसपीए के विशेषज्ञ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह एमओए राजधानी में सड़क निर्माण, रखरखाव, रोड सेफ्टी, ग्रीनिंग, स्ट्रीटस्केप डेवलपमेंट एवं धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक मानकीकृत, वैज्ञानिक और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन फ्रेमवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार केवल नई सड़कें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हम ऐसा अर्बन रोड इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं जो पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक हो। बढ़ते ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब सड़कों का रखरखाव पारंपरिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और डेटा-आधारित प्रणाली से किया जाएगा। बढ़ते शहरीकरण, ट्रैफिक लोड, वायु प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों को देखते हुए अब सड़कों की योजना और रखरखाव को पारंपरिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि वैज्ञानिक एवं डेटा आधारित प्रणाली से संचालित करना समय की आवश्यकता है।
इस ऐतिहासिक एमओए की मुख्य विशेषताएं
इस एमओए के तहत दिल्ली में पहली बार व्यापक रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से राजधानी की सड़कों की वर्तमान स्थिति, उन पर पड़ने वाले यातायात के दबाव, उनकी संरचनात्मक क्षमता, मरम्मत की आवश्यकता और उनकी उपयोग अवधि का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इससे आंकड़ों पर आधारित योजना निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और संभावित समस्याओं की पहले से पहचान कर समय रहते मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस प्रणाली के अंतर्गत सड़कों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, उनकी स्थिति का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा तथा प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और रखरखाव की योजना बनाई जाएगी। इससे सार्वजनिक संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा और सड़क अवसंरचना की गुणवत्ता तथा टिकाऊपन में सुधार आएगा।
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दिल्ली को धूल-मुक्त सड़कों के मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाना भी है। इसके तहत सड़कों के किनारे वैज्ञानिक तरीके से हरित पट्टियां विकसित की जाएंगी, स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वर्षा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा तथा सस्टेनेबल लैंडस्केपिंग के माध्यम से सड़कों को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जाएगा।
मॉनसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को पुनर्गठित किया जाएगा। पेवमेंट डिजाइन में ऐसी तकनीक का उपयोग होगा जो भूजल रिचार्ज में सहायक हो ताकि मॉनसून में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। एमओए के तहत सीएसआईआर-सीआरआरआई सड़क इंजीनियरिंग, पेवमेंट टेक्नोलॉजी, रोड सेफ्टी और एसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा, जबकि एसपीए शहरी डिजाइन, स्ट्रीटस्केप प्लानिंग, पब्लिक स्पेस डेवलपमेंट, अर्बन लैंडस्केपिंग और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देगा। इस साझेदारी के माध्यम से राजधानी की सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डेवलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसमें सड़कों की गुणवत्ता और उपयोगिता के साथ-साथ उनके सौंदर्यीकरण, पर्यावरणीय प्रभाव तथा नागरिकों की सुविधा और अनुभव को भी समान महत्व दिया जाएगा।
दिल्ली बनेगी विश्वस्तरीय मॉडल: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पहले से ही वॉल-टू-वॉल रोड कार्पेटिंग, डस्ट पॉल्यूशन कंट्रोल, मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग, वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम और ग्रीन कॉरिडोर डेवलपमेंट जैसे अनेक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। यह नया समझौता इन सभी प्रयासों को वैज्ञानिक, व्यवस्थित और दीर्घकालिक ढांचा प्रदान करेगा, जिससे राजधानी में स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ सड़क अवसंरचना के विकास को और गति मिलेगी। दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल सड़कों का निर्माण या मरम्मत करना नहीं, बल्कि ऐसे स्मार्ट, सस्टेनेबल और क्लाइमेट-रेजिलिएंट अर्बन कॉरिडोर विकसित करना है, जो भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इस पहल से सड़कों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ वायु प्रदूषण में कमी, सड़क सुरक्षा में वृद्धि, जलभराव की समस्या के समाधान और शहरी सौंदर्यीकरण को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली सरकार, सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के बीच यह त्रिपक्षीय सहयोग राजधानी को आधुनिक, हरित और नागरिक-केंद्रित सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।
इस अवसर पर दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यह समझौता राजधानी की सड़क अवसंरचना को आधुनिक, वैज्ञानिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए डेटा-आधारित और तकनीक-संचालित व्यवस्था विकसित कर रही है। सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से दिल्ली में सड़क विकास, ग्रीनिंग, रोड सेफ्टी और धूल नियंत्रण के लिए एक मानकीकृत फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।
इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार सड़कों के किनारे स्थानीय एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्षों, झाड़ियों और घास के रोपण के माध्यम से डस्ट पॉल्यूशन को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। राजधानी में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग और सड़कों की नियमित सफाई को भी और अधिक वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार स्वच्छ, हरित और स्वस्थ दिल्ली के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह पहल उसी संकल्प का प्रतिबिंब है, जिसके माध्यम से प्रत्येक नागरिक को बेहतर पर्यावरण, स्वच्छ वायु और अधिक सस्टेनेबल शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।