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बंगाल की सरकारी इमारत में भीषण आग, 4 हजार EVM जलकर खाक; साजिश की आशंका से मचा राजनीतिक भूचाल

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में एक सरकारी इमारत में लगी भीषण आग ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दक्षिण कोलकाता स्थित एक सरकारी भवन में आग लगने से करीब 4,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई मशीनों का उपयोग […]

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  • June 12, 2026 6:00 pm IST, Published 1 hour ago

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में एक सरकारी इमारत में लगी भीषण आग ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दक्षिण कोलकाता स्थित एक सरकारी भवन में आग लगने से करीब 4,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई मशीनों का उपयोग हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान किया गया था। घटना के बाद राज्य सरकार, पुलिस और चुनावी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, जबकि विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जानकारी के अनुसार आग गुरुवार देर रात दक्षिण 24 परगना जिला परिषद के प्रशासनिक भवन में लगी। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते भवन के कई हिस्से इसकी चपेट में आ गए। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक हजारों EVM मशीनें आग में जलकर खाक हो चुकी थीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग से उठ रहा धुआं कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था। भवन में मौजूद कर्मचारियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। लेकिन सरकारी संपत्ति को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में EVM मशीनें एक ही भवन में क्यों रखी गई थीं और उनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। आग लगने के बाद राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव में उपयोग की गई मशीनों का सुरक्षित संरक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस प्रकार की घटना चिंता का विषय है।

राज्य के अग्निशमन मंत्री कौशिक चौधरी ने भी घटना को संदिग्ध बताते हुए कहा कि आग लगने के कारणों की गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रथम दृष्टया मामला सामान्य शॉर्ट सर्किट का नहीं लग रहा है। मंत्री के अनुसार कुछ मंजिलों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ जबकि ऊपरी हिस्सों में आग का प्रभाव अधिक दिखाई दिया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।

घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर भेजा गया है, जो आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाएगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं आग जानबूझकर तो नहीं लगाई गई। भवन में लगे विद्युत उपकरणों, वायरिंग, सुरक्षा प्रणाली और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।

इस घटना ने EVM की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीनों को निर्धारित नियमों के तहत सुरक्षित रखा जाता है और आग में नष्ट हुई मशीनों का चुनाव परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में मशीनों का नष्ट होना प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर मामला माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है। विपक्ष जहां सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

फिलहाल पूरे मामले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या साजिश सामने आती है तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है। वहीं यदि आग तकनीकी कारणों से लगी साबित होती है, तब भी सरकारी भवनों और चुनावी उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े होंगे।

4 हजार EVM मशीनों के जलकर नष्ट होने की यह घटना केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि चुनावी सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी व्यवस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मामला बन गई है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे घटनाक्रम की असली तस्वीर सामने लाएंगे।

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