• रिकॉर्ड 7वीं बार समिट का हिस्सा बनने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात संभव
  • 1993 में आजादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की यह पहली ऐतिहासिक यात्रा, ‘भारत इनोवेट्स’ का करेंगे उद्घाटन

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की छह दिवसीय (13 से 18 जून) अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो गए। तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद प्रधानमंत्री का यह यूरोप दौरा बेहद खास माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी वैश्विक मंच पर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। वह दुनिया की सात सबसे आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के समूह ‘G7’ की बैठक में सबसे ज्यादा (7वीं बार) शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि इस वैश्विक महामंच के इतर पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प समेत कई शीर्ष वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है।

फ्रांस के नीस शहर से होगी शुरुआत, ‘भारत इनोवेट्स’ पर नजर

तय कार्यक्रम के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी 13 और 14 जून को फ्रांस के नीस (Nice) शहर पहुंचेंगे। यहां वे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापारिक समझौतों को नया आयाम देंगे। दोनों नेता संयुक्त रूप से शिक्षा मंत्रालय के नए ग्लोबल इनिशिएटिव ‘भारत इनोवेट्स’ का भव्य उद्घाटन भी करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स, आईआईटी (IITs) और विश्वविद्यालयों को दुनिया के बड़े निवेशकों और कॉर्पोरेट्स से जोड़ना है।

स्लोवाकिया का ऐतिहासिक दौरा: 33 साल का इंतजार खत्म

प्रधानमंत्री मोदी 14 जून की शाम स्लोवाकिया के लिए उड़ान भरेंगे और 15 जून तक वहां रहेंगे। साल 1993 में स्लोवाकिया के एक स्वतंत्र संप्रभु देश बनने के बाद, पिछले 33 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। ब्रातिस्लावा में पीएम मोदी वहां के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे, जिससे मध्य यूरोप में भारत के व्यापारिक और कूटनीतिक हित मजबूत होंगे।

G7 समिट: वैश्विक एजेंडे पर भारत रखेगा अपनी बात

स्लोवाकिया से लौटकर प्रधानमंत्री 17 जून को फ्रांस में आयोजित होने वाली G7 समिट में हिस्सा लेंगे। भारत को इस शिखर सम्मेलन में बतौर ‘आउटरीच पार्टनर’ विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इस वर्ष समिट का मुख्य ध्यान वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, सतत विकास और सबसे महत्वपूर्ण—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक नीतियों पर केंद्रित रहेगा। भारत यहां ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के हितों की पुरजोर वकालत करेगा।

क्या है G7 और क्यों बाहर हुआ था रूस?

G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) दुनिया के सात सबसे अमीर और आधुनिक अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। पहले यह समूह G-8 के नाम से जाना जाता था और रूस भी इसका हिस्सा था। लेकिन साल 2014 में जब रूस ने यूक्रेन के हिस्से ‘क्रीमिया’ पर बलपूर्वक कब्जा कर लिया, तो अन्य सात देशों ने मिलकर रूस को इस समूह से निष्कासित कर दिया। जिसके बाद से यह पुनः G7 बन गया।