नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में 12 जून की रात हुई भीषण आग की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। शुरुआत में इसे एक सामान्य अग्निकांड या शॉर्ट सर्किट से हुई दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को पूरी तरह नया मोड़ दे दिया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कोई हादसा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसके चलते एक रिहायशी इमारत में आग लगाई गई और तीन लोगों की जान चली गई।
इस दर्दनाक हादसे में 28 वर्षीय पंकज पांडेय, उनकी 70 वर्षीय नानी सुशीला देवी और 20 वर्षीय बहन सोनिया कुमारी की मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया और स्थानीय लोगों ने इसे दिल्ली की सबसे दुखद घटनाओं में से एक बताया।
आधी रात को मची चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 12 जून की रात करीब ढाई बजे इमारत के निचले हिस्से से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत लपटों से घिर गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों की ओर भागे। कई परिवार धुएं में फंस गए और मदद के लिए चीखते रहे।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी थी।
CCTV फुटेज से खुला राज
घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने विशेष जांच शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई तो एक संदिग्ध महिला और कुछ अन्य लोगों की गतिविधियां सामने आईं। फुटेज के आधार पर पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की और आखिरकार पूरे मामले का खुलासा हो गया।
जांच में पता चला कि आग प्राकृतिक कारणों से नहीं लगी थी, बल्कि जानबूझकर लगाई गई थी। पुलिस के अनुसार, एक नाबालिग लड़की को पेट्रोल और माचिस देकर इमारत के नीचे खड़ी स्कूटी में आग लगाने के लिए उकसाया गया था। स्कूटी में लगी आग तेजी से फैलकर पूरे भवन तक पहुंच गई और देखते ही देखते त्रासदी में बदल गई।
चार आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि घटना के पीछे व्यक्तिगत रंजिश और आपसी विवाद कारण हो सकता है। हालांकि पुलिस अभी सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साजिश में और कौन-कौन शामिल था।
एक छोटी हरकत बनी बड़ी त्रासदी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों का उद्देश्य संभवतः किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाना था, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। नतीजतन निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि रिहायशी इमारतों में पार्किंग क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं, क्योंकि वहां खड़े वाहन और ज्वलनशील सामग्री आग को तेजी से फैलाने का काम करते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास की व्यवस्था होती तो शायद जनहानि कम हो सकती थी। प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा मानकों की समीक्षा के संकेत दिए हैं।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
पंकज पांडेय, सुशीला देवी और सोनिया कुमारी की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पड़ोसियों के अनुसार यह परिवार बेहद साधारण और मेहनतकश था। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश, आगजनी तथा अन्य गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। तुगलकाबाद अग्निकांड अब केवल आग लगने की घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी आपराधिक साजिश के रूप में सामने आया है जिसने तीन जिंदगियां छीन लीं और कई परिवारों को हमेशा के लिए दर्द दे दिया।