कानपुर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और भ्रामक तस्वीरों के प्रसार के मामले में जांच का दायरा अब देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंच गया है। साइबर अपराध शाखा की जांच में एक संदिग्ध फेसबुक अकाउंट की संभावित लोकेशन अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में मिली है, जबकि दूसरे संदिग्ध की लोकेशन महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र में सामने आई है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अखिलेश यादव की बेटी से जुड़ी कथित आपत्तिजनक सामग्री साझा की गई। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई। जांच एजेंसियों ने संबंधित फेसबुक अकाउंट्स की गतिविधियों की पड़ताल की है। प्रारंभिक जांच में कुछ तकनीकी जानकारियां मिली हैं, लेकिन अभी तक सोशल मीडिया कंपनी से आधिकारिक डेटा प्राप्त नहीं हुआ है।
इसी वजह से संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से यूजर आईडी, आईपी एड्रेस, लॉगिन हिस्ट्री और अन्य तकनीकी विवरण मांगे गए हैं। इन जानकारियों के मिलने के बाद मामले की जांच और स्पष्ट हो सकेगी।जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि जिन खातों को अब तक चिन्हित किया गया है, वे कथित तौर पर मूल सामग्री तैयार करने वाले नहीं हैं, बल्कि उन्होंने किसी अन्य स्रोत से पोस्ट साझा या प्रसारित की थी।
ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस व्यक्ति तक पहुंचने की है जिसने पहली बार कथित सामग्री तैयार कर इंटरनेट पर डाली।अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री की जांच में तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर सावधानी बरती जाती है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद ही की जाती है।
इसी बीच साइबर अपराध से जुड़े एक अन्य मामले में पुलिस ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना, फर्जी तस्वीरों और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और डिजिटल जागरूकता दोनों जरूरी हैं। यह मामला भी इसी चुनौती को उजागर करता है कि इंटरनेट पर वायरल होने वाली सामग्री के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना कई बार बेहद जटिल प्रक्रिया बन जाती है। फिलहाल पुलिस और साइबर जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच में जुटी हैं और संबंधित प्लेटफॉर्म से जवाब मिलने का इंतजार कर रही हैं।