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काशी स्टेशन विस्तार परियोजना पर बढ़ा विवाद: गंज शहीदा मस्जिद को खाली करने का नोटिस, कानूनी लड़ाई की तैयारी

वाराणसी : काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और विस्तार परियोजना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रेलवे प्रशासन द्वारा गंज शहीदा मस्जिद परिसर को खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर रेलवे इसे स्टेशन विस्तार और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए आवश्यक कदम […]

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  • June 17, 2026 10:04 am IST, Published 2 hours ago

वाराणसी : काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और विस्तार परियोजना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रेलवे प्रशासन द्वारा गंज शहीदा मस्जिद परिसर को खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर रेलवे इसे स्टेशन विस्तार और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं मस्जिद प्रबंधन और उससे जुड़े संगठनों ने नोटिस की वैधता पर सवाल उठाते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की घोषणा की है।

सूत्रों के अनुसार, काशी रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त आधुनिक परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। लगभग 350 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत स्टेशन परिसर का विस्तार, नई यात्री सुविधाओं का निर्माण, पार्किंग क्षेत्र का विकास और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि विकास कार्य के लिए जिस भूमि की आवश्यकता है, उसमें गंज शहीदा मस्जिद का परिसर भी शामिल है।

रेलवे प्रशासन ने हाल ही में मस्जिद परिसर में नोटिस चस्पा कर 20 जून तक स्थल खाली करने का निर्देश दिया है। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा के बाद प्रशासन आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। नोटिस सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और स्थानीय लोगों के बीच चिंता तथा असमंजस की स्थिति बन गई।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब वाराणसी की मस्जिदों के प्रबंधन से जुड़ी संस्था अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने रेलवे प्रशासन के दावे पर कड़ी आपत्ति जताई। संस्था का कहना है कि नोटिस कई कानूनी कमियों से घिरा हुआ है। उनका आरोप है कि नोटिस पर सक्षम अधिकारी के स्पष्ट हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही जारी करने की तिथि का उल्लेख किया गया है। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण मामले में विधिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए।

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के प्रतिनिधियों ने कहा कि जिस मुकदमे का हवाला देकर कार्रवाई की बात कही जा रही है, वह मस्जिद के अस्तित्व से संबंधित नहीं था, बल्कि आसपास की भूमि से जुड़ा मामला था। उनका दावा है कि पूर्व में रेलवे प्रशासन ने अपने शपथपत्र में मस्जिद के अस्तित्व और समुदाय के स्वामित्व को स्वीकार किया था। ऐसे में अचानक जारी किए गए नोटिस को वे न्यायसंगत नहीं मानते।

संस्था ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का सामाजिक तनाव उत्पन्न न हो।

दूसरी ओर रेलवे प्रशासन का कहना है कि काशी स्टेशन का पुनर्विकास राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और इससे लाखों यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है और सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है। रेलवे का दावा है कि परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ सप्ताहों में स्टेशन विस्तार परियोजना के तहत आसपास की कई संरचनाओं को हटाया जा चुका है। प्रशासन का तर्क है कि वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन शहर में आधुनिक रेलवे अवसंरचना की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी और यह परियोजना शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

फिलहाल यह मामला विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन की बहस का केंद्र बन गया है। एक पक्ष इसे सार्वजनिक हित और आधुनिक विकास से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों की सुरक्षा की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में अदालत, प्रशासन और संबंधित पक्षों के कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे। तब तक काशी स्टेशन विस्तार परियोजना और गंज शहीदा मस्जिद का मुद्दा वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना रहेगा।

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