पेरिस/वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले करीब चार महीनों से चल रहा भीषण युद्ध अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम और शांति बहाली के लिए एक अंतरिम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह ऐतिहासिक संधि फ्रांस के पेरिस स्थित ऐतिहासिक वर्साय पैलेस (Palace of Versailles) में हुई, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किए। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी इस दस्तावेज पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं।
यह समझौता 19 जून को जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में होना तय था, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इसे अचानक फ्रांस में अंतिम रूप दे दिया गया।
समझौते का नाम: इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)।
मुख्य हस्ताक्षरकर्ता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान।
असर: युद्ध की तत्काल समाप्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और लेबनान में भी संघर्ष विराम।
अगला कदम: दोनों पक्षों के पास अंतिम और स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय होगा।
समझौते के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य युद्ध को रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को व्यापार के लिए दोबारा खोलना और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था, जो इस अंतरिम समझौते से हासिल हो गया है। वर्साय पैलेस से निकलते हुए उन्होंने मीडिया से कहा, “यह पूरी तरह साइन हो चुका है”।
ट्रंप ने ईरान को कड़े लहजे में चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इस समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया, तो अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर देगा और ईरान के ऊपर फिर से बम बरसाए जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि वे किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने देंगे।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस शांति समझौते का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों से इसका पूरी तरह पालन करने की अपील की है। इसके साथ ही चीन ने युद्ध से प्रभावित हुए ईरान और लेबनान के इलाकों के लिए बड़ी मानवीय सहायता भेजने की घोषणा की है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन खबरों को पूरी तरह भ्रामक बताया, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर का राहत पैकेज दे रहा है। वेंस ने साफ किया कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम को रोकता है, तो दूसरे देश वहां निवेश कर सकते हैं और उसे अपनी ब्लॉक संपत्तियां मिल सकती हैं, लेकिन अमेरिका अपनी तरफ से कोई पैसा नहीं देगा।
| पक्ष | प्रमुख शर्तें और रियायतें |
| अमेरिका (USA) |
• ईरान अपने देश की धरती पर ही संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को कम (Dilute) करने पर सहमत हुआ है। • होर्मुज स्ट्रेट से अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा। • लेबनान में हिजबुल्लाह के जरिए होने वाले संघर्ष पर लगाम लगेगी। |
| ईरान (Iran) |
• अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक और नौसैनिक प्रतिबंधों (Blockage) से तत्काल राहत मिलेगी। • ईरान 60 दिनों के भीतर बिना किसी रोक-टोक के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल बेच सकेगा। • विदेशों में जमे (Freeze) पड़े ईरानी फंड्स को वापस पाने का रास्ता साफ होगा। |
इस समझौते में सबसे महत्वपूर्ण बात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है, जो दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन है। इसके बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था। इसके अलावा, समझौते में लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने की बात भी कही गई है, जिसका सीधा मतलब है कि ईरान अपने सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह को नियंत्रित रखेगा। हालांकि, इस पूरी वार्ता और समझौते में इजरायल शामिल नहीं है।