पटना: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने भी पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इससे पहले स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम के जरिए लोगों ने घटना पर सवाल खड़े किए थे।
मृतक के परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उस पर गोली चलाई गई। परिवार का दावा है कि घटना के दौरान वह सोशल मीडिया पर लाइव था, जिससे एनकाउंटर की परिस्थितियों को लेकर संदेह और गहरा गया है। परिजन न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
अश्विनी चौबे ने कहा कि यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मी की लापरवाही अथवा गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं विपक्षी दलों ने भी मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं।
घटना के बाद इलाके में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई। बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कुछ कर्मियों पर कार्रवाई की है, लेकिन परिजन और स्थानीय लोग इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।
फिलहाल जांच जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभिन्न दावों के बीच भरत तिवारी एनकाउंटर अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।