हिमाचल प्रदेश ने वन संसाधनों को आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य वन विभाग और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के सहयोग से तैयार नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के जंगलों में लगभग 22,600 करोड़ रुपये की हरित जैव-अर्थव्यवस्था विकसित करने की क्षमता मौजूद है। इसी के साथ एआई आधारित ‘फॉरेस्ट इंटेलिजेंस’ प्रणाली भी लॉन्च की गई है, जो वन प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का काम करेगी।
रिपोर्ट में जंगली फलों, औषधीय उत्पादों, चीड़ की सूखी पत्तियों से इको-कोल, खैर आधारित उद्योग और बांस उत्पादों को ग्रामीण आय के बड़े स्रोत के रूप में चिन्हित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से रोजगार, स्थानीय उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
नई प्रणाली में सैटेलाइट इमेजिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग कर जंगलों की रीयल-टाइम निगरानी की जाएगी। इससे वनाग्नि की रोकथाम, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट तैयार करने के लिए वन विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों ने जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण किया और लाखों डेटा बिंदुओं का संग्रह किया। इस पहल को वन संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करने वाले एक नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।