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स्वदेशी रक्षा निर्माण का महाकेंद्र बनेगा नागपुर

नागपुर स्थित यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) की आयुध निर्माणी अंबाझरी इकाई में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस का भूमि पूजन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को अपनी रक्षा जरूरतों पर स्वयं नियंत्रण स्थापित करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा […]

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  • June 19, 2026 5:38 pm IST, Published 3 hours ago

नागपुर स्थित यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) की आयुध निर्माणी अंबाझरी इकाई में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस का भूमि पूजन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को अपनी रक्षा जरूरतों पर स्वयं नियंत्रण स्थापित करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन ही देश की रणनीतिक मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि यह परियोजना रक्षा, एयरोस्पेस, मिसाइल, रेलवे और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमीनियम प्रोफाइल के स्वदेशी निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी सफलताओं ने साबित किया है कि स्वदेशी तकनीक और उपकरण देश की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दे सकते हैं। इसी दिशा में आधुनिक उत्पादन सुविधाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी एक हजार करोड़ रुपये से कम से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत निर्धारित समय से पहले ही 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

रक्षा मंत्री ने अनुसंधान एवं विकास (R&D), नवाचार और पूंजी निवेश को औद्योगिक प्रगति का आधार बताते हुए रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों से आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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