गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गाजियाबाद के संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने कमर कस ली है। शुक्रवार को आरटीओ दफ्तर में परिवहन व्यवसायियों, स्कूल संचालकों, वाहन डीलरों, ऑयल कंपनियों और रजिस्टर्ड वाहन स्क्रैपिंग सेंटरों (RVSF) के प्रतिनिधियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सड़कों से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले और अपनी तय आयु सीमा पूरी कर चुके पुराने व्यावसायिक वाहनों को हटाना है।
एआरटीओ (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बैठक में साफ किया कि सरकार का मुख्य फोकस पुराने वाहनों को सड़कों से पूरी तरह हटाना है। इसकी जगह अब परिवहन विभाग निम्नलिखित वाहनों को बढ़ावा दे रहा है:
BS-6 मानक वाले नए वाहन
CNG (सीएनजी) चालित गाड़ियां
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)
स्क्रैपिंग के लिए जागरूकता अभियान: परिवहन विभाग अब ऐसे वाहन स्वामियों को जागरूक कर रहा है जिनकी गाड़ियों की कानूनी समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। इन वाहनों को सरकार द्वारा अधिकृत (Registered) स्क्रैपिंग सेंटरों पर भेजने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
एआरटीओ प्रशासन ने बैठक में स्क्रैपिंग पॉलिसी के तीन सबसे बड़े फायदों को सामने रखा:
प्रदूषण में भारी कमी: पुराने डीजल और पेट्रोल वाहन एनसीआर की हवा को सबसे ज्यादा खराब करते हैं। इनके हटने से प्रदूषण स्तर में सुधार होगा।
ईंधन दक्षता (Mileage): नए BS-6 और इलेक्ट्रिक वाहन कम लागत में ज्यादा माइलेज देते हैं, जिससे मालिकों को आर्थिक फायदा होगा।
सड़क सुरक्षा: उम्र पूरी कर चुके वाहनों में ब्रेक और तकनीकी खराबी के चलते हादसे होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों और ट्रक-बस एसोसिएशनों से इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरा सहयोग मांगा है। विभाग ने चेतावनी भी दी है कि समय-सीमा पार कर चुके वाहनों को सड़कों पर दौड़ते पाए जाने पर भारी जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।