नई दिल्ली। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के युवाओं को रोजगार और करियर के बदलते स्वरूप को समझने की सलाह देते हुए कहा है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री, एमबीए या पारंपरिक प्रोफेशनल कोर्स ही सफलता का रास्ता नहीं होंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्लंबिंग, वेल्डिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, बढ़ईगिरी, हॉस्पिटैलिटी, काउंसलिंग और केयरगिविंग जैसे व्यावसायिक कौशल भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने जा रहे हैं।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि भारत में लंबे समय से करियर को केवल डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस या एमबीए जैसे पेशों तक सीमित करके देखा जाता रहा है। इसके कारण लाखों युवा डिग्रियां तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उनके पास रोजगार बाजार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कौशल नहीं होता। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज व्यावसायिक और तकनीकी कार्यों को भी उतना ही सम्मान दे जितना अन्य पेशों को दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही है। ऐसे में कई पारंपरिक कार्यालयी नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन ऐसे कार्य जिनमें मानवीय कौशल, अनुभव और शारीरिक दक्षता की आवश्यकता होती है, उन्हें मशीनें आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर पाएंगी। प्लंबर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई, तकनीकी मरम्मत विशेषज्ञ और सेवा क्षेत्र से जुड़े पेशेवर भविष्य में भी प्रासंगिक बने रहेंगे।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि विकसित देशों ने काफी पहले ही कौशल आधारित शिक्षा के महत्व को समझ लिया था। जर्मनी, स्विट्जरलैंड, जापान और चीन जैसे देशों में स्किल-बेस्ड एजुकेशन को उच्च प्राथमिकता दी जाती है। वहां तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और बेहतर आय के अवसर मिलते हैं। भारत को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि युवा केवल डिग्री के भरोसे न रहें बल्कि अपने कौशल के दम पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर सकें।
नागेश्वरन ने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। यदि इस युवा शक्ति को सही दिशा में कौशल प्रशिक्षण दिया जाए तो भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी कुशल कार्यबल शक्ति बन सकता है। लेकिन यदि कौशल विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया तो देश अपने जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) का पूरा फायदा नहीं उठा पाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आज रोजगार बाजार में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है। कंपनियां और उद्योग ऐसे लोगों की तलाश में हैं जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान, समस्या समाधान की क्षमता और वास्तविक कार्य अनुभव हो। इसलिए युवाओं को अपने करियर की योजना बनाते समय केवल डिग्री प्राप्त करने के बजाय रोजगार क्षमता बढ़ाने वाले कौशल सीखने पर भी ध्यान देना चाहिए।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, बुजुर्गों की देखभाल, काउंसलिंग और अन्य मानव-केंद्रित सेवाओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोगों की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी। इन क्षेत्रों में मानवीय संवेदनशीलता और व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता होती है, जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।
उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया और दिखावटी सफलता के प्रभाव से बचने की सलाह देते हुए कहा कि हर व्यक्ति की सफलता का मार्ग अलग होता है। किसी कुशल तकनीशियन, वेल्डर या प्लंबर का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी कॉर्पोरेट प्रोफेशनल का। समाज को ऐसे पेशों के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी और कौशल आधारित कार्यों को सम्मान देना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बढ़ते औद्योगीकरण, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, स्मार्ट सिटी मिशन और सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण तकनीकी और व्यावसायिक कौशल वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में वी. अनंत नागेश्वरन का यह संदेश न केवल युवाओं के लिए बल्कि शिक्षा नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में रोजगार, कौशल विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। नागेश्वरन का मानना है कि भारत का भविष्य केवल डिग्रियों से नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार और व्यावहारिक दक्षता से तय होगा।