नई दिल्ली/नागपुर। देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। महाराष्ट्र के नागपुर के एक अभ्यर्थी को री-NEET परीक्षा के लिए 2,500 किलोमीटर दूर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने का मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया। शुरुआत में इसे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की गंभीर तकनीकी चूक माना गया और सोशल मीडिया पर एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी आलोचना हुई। लेकिन अब NTA की सफाई ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
दरअसल, नागपुर निवासी NEET अभ्यर्थी अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब को जारी किए गए एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र अबू धाबी दर्शाया गया था। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, छात्र और उसके परिवार के होश उड़ गए। परिवार का कहना था कि उन्होंने कभी विदेश में परीक्षा केंद्र नहीं चुना और उनके पास तो पासपोर्ट तक नहीं है। ऐसे में परीक्षा देने के लिए विदेश जाना असंभव था। मामला मीडिया और सोशल मीडिया में तेजी से फैल गया, जिसके बाद लोगों ने NTA की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
विवाद बढ़ने पर NTA ने पूरे मामले की जांच की और अपने डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर चौंकाने वाला दावा किया। एजेंसी ने कहा कि उपलब्ध वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड और लॉग डेटा से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि उम्मीदवार ने स्वयं अपने लॉगिन आईडी से अबू धाबी परीक्षा केंद्र का चयन किया था। इतना ही नहीं, NTA के अनुसार उम्मीदवार ने केंद्र चयन से संबंधित विकल्पों को एक से अधिक बार देखा और बाद में बदलाव भी किया था।
एजेंसी का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्र ने परीक्षा केंद्र की जानकारी दो बार सत्यापित की थी। इसलिए इसे किसी तकनीकी गड़बड़ी या सिस्टम फेल्योर का मामला नहीं माना जा सकता। NTA ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में कहीं भी ऐसी कोई त्रुटि नहीं मिली है, जिससे यह साबित हो सके कि केंद्र स्वतः बदल गया था या सिस्टम ने गलत आवंटन किया था।
हालांकि, छात्र और उसके परिवार की ओर से लगातार विरोध दर्ज कराए जाने के बाद NTA ने मानवीय आधार पर राहत देने का फैसला किया। एजेंसी ने छात्र को नागपुर में ही नया परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया, ताकि वह बिना किसी परेशानी के परीक्षा में शामिल हो सके। इसके लिए संशोधित एडमिट कार्ड भी जारी किया गया।
इस घटना ने एक बार फिर NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रबंधन व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में NEET परीक्षा पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों की अनियमितताओं और तकनीकी समस्याओं को लेकर कई बार विवादों में रही है। ऐसे में अबू धाबी केंद्र विवाद ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे गलती किसी भी पक्ष की रही हो, लेकिन ऐसी घटनाएं लाखों छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं और किसी भी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी समस्या उनके भविष्य पर असर डाल सकती है। इसलिए आवेदन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सरल तथा सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है।
वहीं, NTA का कहना है कि री-NEET 2026 को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। एजेंसी ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे आवेदन और परीक्षा केंद्र संबंधी सभी जानकारियों को समय-समय पर जांचते रहें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन से संपर्क करें।
फिलहाल, NTA की सफाई के बाद यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उम्मीदवार द्वारा किए गए केंद्र चयन और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में यह मामला शिक्षा जगत और अभ्यर्थियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।