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लीवर और किडनी पर खतरे के चलते Nimesulide + Paracetamol संयोजन पर केंद्र सरकार का प्रतिबंध

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Nimesulide + Paracetamol डिस्पर्सिबल टैबलेट के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि इस दवा संयोजन (Fixed Dose […]

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  • June 23, 2026 11:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Nimesulide + Paracetamol डिस्पर्सिबल टैबलेट के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि इस दवा संयोजन (Fixed Dose Combination) के पक्ष में पर्याप्त चिकित्सीय औचित्य (Therapeutic Justification) उपलब्ध नहीं है और इसके उपयोग से मरीजों को लाभ की तुलना में अधिक जोखिम हो सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विशेषज्ञों ने इस दवा के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया। जांच में पाया गया कि Nimesulide और Paracetamol का यह संयोजन चिकित्सा दृष्टि से आवश्यक नहीं माना जा सकता तथा इसके उपयोग से गंभीर दुष्प्रभाव उत्पन्न होने की आशंका रहती है। इसी आधार पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26A के तहत इस दवा के निर्माण, बिक्री और वितरण को प्रतिबंधित किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि Nimesulide लंबे समय से विवादों में रही दवा है। कई अध्ययनों में इसके अत्यधिक उपयोग को लीवर संबंधी समस्याओं से जोड़ा गया है। यही कारण है कि विभिन्न देशों में इस दवा के उपयोग पर समय-समय पर प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण लगाए गए हैं। भारत सरकार ने भी पहले Nimesulide की उच्च मात्रा वाली मौखिक दवाओं पर रोक लगाई थी और अब इसके कुछ संयोजनों को भी बाजार से हटाने का निर्णय लिया गया है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, Nimesulide + Paracetamol के लगातार या अनियंत्रित उपयोग से लीवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को हेपाटोटॉक्सिसिटी (Hepatotoxicity) कहा जाता है, जिसमें लीवर की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं और गंभीर मामलों में लीवर फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेष रूप से उन लोगों में जोखिम अधिक होता है जो पहले से किसी लीवर रोग से पीड़ित हों या लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर रहे हों।

इसके अलावा, इस दवा संयोजन का प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक उपयोग करने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे शरीर में विषैले तत्वों को बाहर निकालने की क्षमता कम हो जाती है। कुछ मामलों में यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है और मरीज को अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी इस संयोजन से जुड़ी हुई बताई जाती हैं। लगातार सेवन करने वाले मरीजों में पेट दर्द, एसिडिटी, अल्सर तथा पेट के भीतर रक्तस्राव जैसी शिकायतें देखी गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसी दवाओं का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य मरीजों को संभावित दुष्प्रभावों से बचाना और वैज्ञानिक आधार पर सुरक्षित दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी दर्द या बुखार की दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें और प्रतिबंधित दवा संयोजनों के उपयोग से बचें।

यह कदम दवा बाजार में उपलब्ध अवैज्ञानिक और जोखिमपूर्ण फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और अधिक प्रभावी तथा सुरक्षित उपचार विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा।

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