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जमीन खरीद को लेकर बढ़ा सियासी घमासान,पवन खेड़ा ने MP सरकार को घेरा

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार द्वारा जमीन खरीद से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि यह केवल एक राज्य या स्थानीय स्तर का विषय नहीं है, बल्कि इससे व्यापक जनभावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने […]

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  • June 24, 2026 1:58 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार द्वारा जमीन खरीद से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि यह केवल एक राज्य या स्थानीय स्तर का विषय नहीं है, बल्कि इससे व्यापक जनभावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकुंभ से संबंधित क्षेत्र में जमीन खरीद को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब जनता को मिलना चाहिए।

दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पवन खेड़ा ने कहा कि उन्होंने इस विषय पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से चर्चा की है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्रों से जुड़े मामलों को सामान्य प्रशासनिक मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा सकता। ऐसे स्थानों से देश-विदेश के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी होती है और वहां होने वाले विकास कार्यों तथा भूमि लेन-देन को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने से पहले और उसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार द्वारा बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी गई। उन्होंने दावा किया कि परिवार ने उस क्षेत्र में भी भूमि खरीदी, जहां भविष्य में महाकुंभ से संबंधित गतिविधियां और विकास कार्य प्रस्तावित थे। खेड़ा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या परिवार को पहले से विकास योजनाओं की जानकारी थी और उसके आधार पर जमीन खरीदी गई, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि तीर्थस्थलों और धार्मिक आयोजनों से जुड़े क्षेत्रों में जमीन की कीमतों पर विकास परियोजनाओं का सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी को अंदरूनी जानकारी का लाभ न मिले। कांग्रेस का कहना है कि इस पूरे मामले में तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार की ओर से इस तरह के आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी और राजनीतिक माहौल को देखते हुए भूमि, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े मुद्दे विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच प्रमुख बहस का विषय बन सकते हैं।

महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों से जुड़े क्षेत्रों में भूमि खरीद और विकास योजनाओं को लेकर पहले भी विभिन्न राज्यों में राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी को लेकर जनता की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं।

फिलहाल कांग्रेस ने इस मामले को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना दिया है और विस्तृत जानकारी सामने लाने की मांग की है। दूसरी ओर, इस विषय पर सरकार या संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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