गाजियाबाद: मृत समझे गए गिरधर सिंह बिष्ट 39 दिन बाद लौटे घर

गाजियाबाद: मृत मानकर अंतिम संस्कार, 39 दिन बाद घर लौटे गिरधर सिंह बिष्ट उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल एक परिवार को बल्कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन को भी हैरानी में डाल दिया है। जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जिसकी तेरहवीं […]

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  • June 26, 2026 9:09 pm IST, Published 2 hours ago

गाजियाबाद: मृत मानकर अंतिम संस्कार, 39 दिन बाद घर लौटे गिरधर सिंह बिष्ट उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल एक परिवार को बल्कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन को भी हैरानी में डाल दिया है। जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जिसकी तेरहवीं तक की सभी धार्मिक रस्में पूरी हो चुकी थीं, वही शख्स 39 दिन बाद अचानक अपने घर लौट आया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह शव किसका था, जिसका अंतिम संस्कार गिरधर सिंह बिष्ट समझकर किया गया था।

जानकारी के अनुसार, कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली स्थित कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट 16 मई को स्थानीय लोगों से हुए विवाद के बाद पुलिस की कार्रवाई के चलते हिरासत में लिए गए थे। पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल भेज दिया था। लगभग पांच दिन बाद 21 मई को उनकी रिहाई हो गई, लेकिन इसके बाद वह सीधे अपने घर नहीं पहुंचे। परिवार ने पहले रिश्तेदारों और परिचितों के यहां उनकी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती गई। परिजनों ने पुलिस में भी उनकी गुमशुदगी से संबंधित जानकारी दी और विभिन्न स्थानों पर खोजबीन जारी रखी। इसी दौरान 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। शव की पहचान कराने के लिए पुलिस ने परिजनों को बुलाया। परिवार ने शव की पहचान गिरधर सिंह बिष्ट के रूप में कर ली। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।

परिवार ने पूरे रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया। इसके बाद शोक की सभी रस्में निभाई गईं और तेरहवीं भी संपन्न हो गई। परिवार इस दुख से उबरने की कोशिश कर ही रहा था कि अचानक 39 दिन बाद गिरधर सिंह बिष्ट खुद घर के दरवाजे पर पहुंच गए। उन्हें सामने देखकर परिवार के सदस्य स्तब्ध रह गए। पहले तो किसी को विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने खुद अपनी पहचान बताई तो घर में मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे।

गिरधर सिंह बिष्ट के अचानक लौट आने के बाद पूरे इलाके में इस घटना की चर्चा शुरू हो गई। पड़ोसी और स्थानीय लोग भी इस घटनाक्रम को किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं मान रहे हैं। वहीं, पुलिस के सामने अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस शव की पहचान गिरधर सिंह बिष्ट के रूप में की गई थी, वह आखिर किस व्यक्ति का था। यदि पहचान में इतनी बड़ी चूक हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है और वास्तविक मृतक की पहचान कैसे होगी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस अब पूरे मामले की दोबारा जांच कर रही है। गिरधर सिंह बिष्ट से यह भी पूछताछ की जाएगी कि जेल से रिहा होने के बाद वह इतने दिनों तक कहां रहे और परिवार से संपर्क क्यों नहीं किया। वहीं, अज्ञात शव की पहचान के लिए भी पुलिस नए सिरे से जांच और वैज्ञानिक तरीकों का सहारा ले सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में केवल परिजनों की पहचान के आधार पर शव सौंपना कई बार भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। यदि शव की हालत खराब हो या पहचान स्पष्ट न हो तो डीएनए जांच जैसे वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित माना जाता है। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है।

फिलहाल यह मामला गाजियाबाद ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि जिसे मृत समझ लिया गया था, वह जीवित लौट आया। वहीं दूसरी ओर पुलिस के लिए यह घटना जांच और पहचान प्रक्रिया की गंभीर परीक्षा बन गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर अज्ञात शव की वास्तविक पहचान कब सामने आएगी और इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है।

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