नई दिल्ली/तेहरान: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की स्मृति में आयोजित होने वाले अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भारत की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन तथा विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा को नामित किया है। दोनों प्रतिनिधि ईरान में आयोजित होने वाले आधिकारिक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
ईरान में 4 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक दिवंगत नेता की स्मृति में कई धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में दुनिया के अनेक देशों के प्रतिनिधियों, राजनयिकों, धार्मिक नेताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। ईरानी प्रशासन ने श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
भारत-ईरान संबंधों पर रहेगी नजर
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में दोनों देशों का सहयोग लगातार बना हुआ है। ऐसे में भारत की ओर से वरिष्ठ प्रतिनिधियों का अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होना दोनों देशों के पारंपरिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात कर सकता है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर ऐसी किसी बैठक की पुष्टि नहीं की गई है।
कई देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद
ईरानी मीडिया के अनुसार, श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एशिया, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों और विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रमुखों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
तेहरान सहित ईरान के कई प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का विस्तृत आयोजन
ईरान सरकार ने बताया है कि अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किए जाएंगे। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभाएं भी आयोजित होंगी, जिनमें लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। राजधानी तेहरान के अलावा अन्य प्रमुख शहरों में भी विशेष कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।
इन कार्यक्रमों के दौरान दिवंगत नेता के योगदान, उनके राजनीतिक और धार्मिक जीवन तथा ईरान के विकास में उनकी भूमिका को याद किया जाएगा। देशभर में सरकारी और सामाजिक संस्थाएं भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करेंगी।
भारत की ओर से सम्मानजनक भागीदारी
भारत सरकार की ओर से वरिष्ठ प्रतिनिधियों को भेजने का निर्णय दोनों देशों के पारस्परिक सम्मान और द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है। विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि ऐसे अवसरों पर प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है और इससे मित्र देशों के साथ विश्वास और सहयोग को मजबूती मिलती है।
भारत ने हमेशा पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित और सहयोगात्मक संबंध बनाए रखने की नीति अपनाई है। ऐसे में इस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को भी उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है।
सुरक्षा और प्रबंधन पर विशेष ध्यान
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लाखों लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है। प्रमुख कार्यक्रम स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था और विशेष प्रोटोकॉल भी लागू किए जाएंगे।
इसके अलावा हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और प्रमुख मार्गों पर भी सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार
भारत सरकार और ईरान सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल के विस्तृत कार्यक्रम और संभावित बैठकों को लेकर फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय की ओर से विस्तृत कार्यक्रम सार्वजनिक किया जा सकता है।
भारत की इस भागीदारी को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परंपराओं और भारत-ईरान संबंधों की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में होने वाले कार्यक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इनमें कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।