नई दिल्ली: वेनेजुएला में मृत पाए गए भारतीय नाविक राकेश चौहान के शव को भारत लाए जाने के बाद सामने आए पोस्टमार्टम के निष्कर्षों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने दावा किया है कि भारत में किए गए पोस्टमार्टम के दौरान शव में कई प्रमुख आंतरिक अंग नहीं मिले। इस मामले को लेकर यूनियन ने निष्पक्ष जांच, पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने और भारतीय दूतावास की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि राकेश चौहान मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान वेनेजुएला में उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताओं के पश्चात उनका शव भारत भेजा गया। हालांकि भारत पहुंचने के बाद हुए पोस्टमार्टम में सामने आए कथित निष्कर्षों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।
पोस्टमार्टम में प्रमुख अंग नहीं मिलने का दावा
फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया के अनुसार भारत में हुए आधिकारिक पोस्टमार्टम में यह दावा किया गया कि शव के भीतर कई महत्वपूर्ण आंतरिक अंग मौजूद नहीं थे। यूनियन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दिल, दिमाग, दोनों फेफड़े, लीवर, किडनी, तिल्ली, अग्न्याशय, पेट, आंतें, थायराइड, पैराथायराइड, लैरिंक्स और ट्रेकिया सहित कई आवश्यक अंग नहीं पाए गए।
यूनियन का कहना है कि यदि यह तथ्य पूरी तरह सही हैं तो यह अत्यंत गंभीर मामला है, जिसकी उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
मौत की परिस्थितियों पर भी उठे सवाल
यूनियन ने केवल अंगों के गायब होने के दावे तक ही अपनी चिंता सीमित नहीं रखी है, बल्कि नाविक की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इस पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि मृतक के परिवार को सच्चाई का पता चल सके।
संगठन ने यह भी मांग की है कि भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां वेनेजुएला के अधिकारियों से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की मांग
फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया ने भारतीय दूतावास से इस मामले में सक्रिय हस्तक्षेप करने की अपील की है। यूनियन का कहना है कि विदेशों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
संगठन ने मांग की है कि वेनेजुएला में संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि आवश्यक हो तो दोनों देशों के स्तर पर भी इस विषय पर समन्वय स्थापित किया जाए।
परिवार को न्याय दिलाने की मांग
राकेश चौहान के परिवार और यूनियन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी। उनका मानना है कि यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक परिवार का मामला नहीं बल्कि विदेशों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।
परिवार ने सरकार से अनुरोध किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में विदेश में पोस्टमार्टम या फोरेंसिक जांच के दौरान कुछ अंगों के नमूने परीक्षण के लिए सुरक्षित रखे जा सकते हैं। हालांकि ऐसी किसी भी प्रक्रिया का स्पष्ट दस्तावेजी रिकॉर्ड होना आवश्यक होता है और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी परिजनों तथा संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध करानी चाहिए।
यदि किसी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंगों के अनुपस्थित होने का उल्लेख किया गया है, तो उसकी जांच उपलब्ध दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अनुरूप की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित माना जाता है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया द्वारा लगाए गए दावों ने कई सवाल जरूर खड़े किए हैं। हालांकि संबंधित सरकारी एजेंसियों या वेनेजुएला के अधिकारियों की ओर से इन दावों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
ऐसे में यह आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि मृत्यु के वास्तविक कारण, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तथा कथित रूप से गायब बताए गए अंगों से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सके। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।