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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा ओजोन प्रदूषण, गर्मी और स्वास्थ्य पर खतरा

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में ओजोन प्रदूषण लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के कई इलाके ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में उभरकर सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि […]

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  • July 1, 2026 6:30 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में ओजोन प्रदूषण लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के कई इलाके ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में उभरकर सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने और तेज धूप के कारण ओजोन का स्तर और अधिक बढ़ सकता है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5, नोएडा सेक्टर-125 और गाजियाबाद के वसुंधरा क्षेत्र में ओजोन प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया। इन इलाकों में वायु गुणवत्ता के अन्य मानकों के साथ-साथ ओजोन का स्तर भी तय सीमा से ऊपर पाया गया, जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है।

क्या है ग्राउंड-लेवल ओजोन?

विशेषज्ञ बताते हैं कि जिस ओजोन परत की चर्चा पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने के संदर्भ में होती है, वह वायुमंडल की ऊपरी परत में मौजूद होती है। वहीं, जमीन के करीब बनने वाली ग्राउंड-लेवल ओजोन एक खतरनाक प्रदूषक है। यह सीधे वातावरण में नहीं छोड़ी जाती, बल्कि वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) की तेज धूप और गर्मी में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से बनती है।

इसी कारण गर्मियों के मौसम में, विशेषकर दोपहर के समय, ओजोन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि तापमान ऊंचा बना रहा तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में ओजोन के संपर्क में आने से सांस लेने में परेशानी, गले में जलन, आंखों में खुजली, खांसी और सीने में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए यह प्रदूषण विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लंबे समय तक अधिक ओजोन वाले वातावरण में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

गर्मी बढ़ने से और बिगड़ सकती है स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने के साथ ओजोन प्रदूषण में और वृद्धि हो सकती है। तेज धूप, कम हवा और वाहनों से निकलने वाला धुआं इस समस्या को और गंभीर बना देता है। इसलिए मौसम विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार वायु गुणवत्ता पर नजर बनाए हुए हैं।

किन क्षेत्रों में अधिक खतरा?

रिपोर्ट में जिन क्षेत्रों को प्रमुख ओजोन हॉटस्पॉट बताया गया है, उनमें शामिल हैं—

ग्रेटर नोएडा का नॉलेज पार्क-5

नोएडा सेक्टर-125

गाजियाबाद का वसुंधरा क्षेत्र

इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

बचाव के लिए क्या करें?

  • विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—
  • दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें।
  • यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो मास्क का उपयोग करें।
  • अधिक पानी पीएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां नियमित लें।
  • सुबह और देर शाम के समय व्यायाम करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और प्रदूषण संबंधी चेतावनियों पर नजर रखें।

प्रदूषण नियंत्रण की जरूरत

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) ही नहीं, बल्कि ओजोन प्रदूषण पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना, औद्योगिक प्रदूषण कम करना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली-एनसीआर में ओजोन प्रदूषण आने वाले वर्षों में और बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन सकता है।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता ओजोन प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। बढ़ती गर्मी के साथ इस प्रदूषण के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सरकार, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाकर इस अदृश्य खतरे से स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

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