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बदलती आबादी पर सरकार अलर्ट,गृह मंत्री ने मांगी जल्द रिपोर्ट

नई दिल्ली: देश में बदलते जनसांख्यिकीय परिदृश्य, अवैध प्रवास और उससे जुड़े संभावित सामाजिक, प्रशासनिक तथा सुरक्षा संबंधी प्रभावों का व्यापक अध्ययन करने के लिए गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज ने मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। बैठक के दौरान समिति ने अपनी कार्ययोजना से गृह मंत्री […]

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  • July 1, 2026 7:23 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: देश में बदलते जनसांख्यिकीय परिदृश्य, अवैध प्रवास और उससे जुड़े संभावित सामाजिक, प्रशासनिक तथा सुरक्षा संबंधी प्रभावों का व्यापक अध्ययन करने के लिए गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज ने मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। बैठक के दौरान समिति ने अपनी कार्ययोजना से गृह मंत्री को अवगत कराया और बताया कि वह देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर ज़मीनी स्तर पर तथ्य जुटाएगी।

समिति ने बताया कि केवल दस्तावेज़ी अध्ययन तक सीमित रहने के बजाय वह प्रत्यक्ष संवाद, क्षेत्रीय दौरे और विभिन्न सरकारी विभागों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहले से एक विस्तृत प्रश्नावली भेजी जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर की जानकारी व्यवस्थित रूप से संकलित की जा सके।

बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने समिति की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए गृह सचिव को निर्देश दिए कि समिति को उसके सभी दौरों और अध्ययन कार्यों में आवश्यक प्रशासनिक एवं संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समिति अपनी सिफारिशें यथाशीघ्र सरकार को सौंपे, ताकि आवश्यक नीतिगत निर्णय समय पर लिए जा सकें।

यह समिति उस हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन का हिस्सा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को की थी। मिशन का उद्देश्य देश में अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसंख्या संबंधी बदलावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना और उनके दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन करना है।

समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं। इसके अन्य सदस्यों में पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PMEAC) की सदस्य डॉ. शमिका रवि तथा जनगणना आयुक्त शामिल हैं।

समिति का दायरा केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। यह विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारणों, उनके सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रभावों का विश्लेषण करेगी। साथ ही यह भी अध्ययन किया जाएगा कि किन इलाकों में अवैध प्रवास या अन्य असामान्य कारणों से जनसंख्या संरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं और उनसे निपटने के लिए कौन-से विधायी, नीतिगत तथा प्रशासनिक उपाय आवश्यक हैं।

सरकार का मानना है कि भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के संतुलित वितरण, आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक रणनीति के लिए जनसांख्यिकीय बदलावों का सटीक आकलन आवश्यक है। समिति की रिपोर्ट को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जा रहा है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार आगे की नीति तय कर सकती है।

 

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