नयी दिल्ली: भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए हेलीकॉप्टर परिचालन के लिए देश की पहली प्राइवेट प्वाइंट-इन-स्पेस (PinS) इंस्ट्रूमेंट अप्रोच प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां अत्याधुनिक उपग्रह आधारित नेविगेशन तकनीक के जरिए ऐसे हेलीपोर्टों पर भी सुरक्षित उड़ान और लैंडिंग संभव होगी, जहां पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं है।
यह ऐतिहासिक शुरुआत आंध्र प्रदेश के उंडावल्ली हेलीपोर्ट से की गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा विकसित इस प्रणाली को नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप मंजूरी दी है।
PinS तकनीक हेलीकॉप्टरों को सैटेलाइट आधारित नेविगेशन की मदद से खराब मौसम, कम दृश्यता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी अधिक सटीक और सुरक्षित तरीके से हेलीपोर्ट तक पहुंचने में सक्षम बनाती है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों, द्वीपों, सीमावर्ती इलाकों और उन स्थानों पर उड़ान संचालन आसान होगा जहां जमीन आधारित नेविगेशन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इसे भारत के हेलीकॉप्टर सेक्टर में “नए युग की शुरुआत” बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से देश में उड़ान सुरक्षा, परिचालन क्षमता और हर मौसम में कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में चारधाम हेलीकॉप्टर सेवाओं का सुरक्षित संचालन और अब PinS प्रणाली की शुरुआत भारत के विमानन क्षेत्र में तकनीकी परिवर्तन का प्रमाण है।
सरकार का मानना है कि यह तकनीक केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आपदा प्रबंधन, एयर एम्बुलेंस, रक्षा सहयोग, पर्यटन, कॉर्पोरेट एविएशन, अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं और दूरदराज के इलाकों तक तेज संपर्क स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भविष्य में देश के अनेक हेलीपोर्टों पर ऐसी PinS प्रक्रियाएं लागू होने से हेलीकॉप्टर नेटवर्क अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और आधुनिक बनेगा। साथ ही भारत का विमानन क्षेत्र परफॉर्मेंस-बेस्ड नेविगेशन (PBN) और स्वदेशी उपग्रह आधारित तकनीकों के उपयोग में वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित करेगा और आने वाले वर्षों में यह प्रणाली देश के हेलीकॉप्टर परिचालन की दिशा और गति दोनों बदल सकती है।