नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एसीएमई ग्रुप की सहयोगी कंपनी एसीएमई क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने जापान की प्रमुख कंपनियों के साथ हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों को भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र और हरित ईंधन निर्यात की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एसीएमई ने जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन के साथ हरित अमोनिया और मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी (एमजीसी) के साथ हरित मेथनॉल की आपूर्ति के लिए समझौते किए। समझौते के तहत एसीएमई हर वर्ष लगभग 4.05 लाख टन हरित अमोनिया तथा 1 लाख टन हरित मेथनॉल की आपूर्ति करेगा। हरित मेथनॉल की आपूर्ति ओडिशा के पारादीप स्थित संयंत्र से की जाएगी।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत वर्ष 2023 में लगभग 19,744 करोड़ रुपये के बजट के साथ की गई थी। मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसी मिशन के अंतर्गत ‘स्ट्रैटेजिक इंटरवेंशंस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन’ (SIGHT) योजना के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। एसीएमई को इस योजना के तहत प्रतिवर्ष 3.70 लाख टन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि जापान द्वारा इस परियोजना को समर्थन मिलना भारत के हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां मजबूत कर रहा है और भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक बाजारों के नए अवसर खुल रहे हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि इन समझौतों से भारत और जापान के बीच हरित ईंधन का मजबूत व्यापारिक नेटवर्क विकसित होगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, भारतीय स्वच्छ ईंधन उद्योग को वैश्विक पहचान मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
ये समझौते भारत की ऊर्जा कूटनीति, हरित ईंधन निर्यात और कार्बन उत्सर्जन कम करने की वैश्विक रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही, जापान की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है।