कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आज कोलकाता में औपचारिक शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नए विधायकों को संसदीय लोकतंत्र, विधानसभा की कार्यप्रणाली, संवैधानिक दायित्वों और जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी जिम्मेदारियों से परिचित कराना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर जोर दिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा सदन की गरिमा बनाए रखते हुए प्रभावी और जिम्मेदार भागीदारी निभाने पर भी निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि नए विधायकों के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संसदीय प्रक्रियाओं को समझने, नियमों की जानकारी प्राप्त करने और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन में उठाने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही, प्रश्नकाल, शून्यकाल, विधेयकों की प्रक्रिया, समितियों की भूमिका, वित्तीय कार्यवाही, संसदीय आचरण और संवैधानिक मर्यादाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जाएगी। साथ ही संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रियाओं और सदन में प्रभावी संवाद की तकनीकों पर भी विस्तृत सत्र आयोजित किए जाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वस्थ बहस और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं और उनकी सक्रिय, तथ्यपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाती है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसदीय संस्थाओं की मजबूती के लिए जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षित और नियमों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। वहीं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने लोकतांत्रिक संवाद, अनुशासन और सदन की गरिमा बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और नवनिर्वाचित विधायकों ने सामूहिक छायाचित्र भी खिंचवाया। इस प्रकार के ओरिएंटेशन कार्यक्रमों को विधायकों की क्षमता निर्माण और प्रभावी विधायी कार्य संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।