नई दिल्ली: राम मंदिर से जुड़े कथित दान प्रकरण के बीच कांग्रेस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना, गठन और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने आरोप लगाया कि मंदिर के लिए पहले से मौजूद धार्मिक ट्रस्ट के बावजूद केंद्र सरकार ने नया ट्रस्ट गठित किया और उसके गठन तथा कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रश्न अब सामने आ रहे हैं।
रागिनी नायक ने कहा कि अयोध्या में पहले से शंकराचार्यों से जुड़ा एक ट्रस्ट मौजूद था, जिसने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी संभालने की इच्छा भी जताई थी। उनका दावा है कि इसके बावजूद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया, जिसे मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नए ट्रस्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों को स्थान दिया गया तथा ट्रस्ट को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के दायरे से बाहर रखा गया। उन्होंने कहा कि हाल में सामने आए कथित दान प्रकरण के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
रागिनी नायक ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ट्रस्ट की संरचना इस तरह तैयार की गई थी कि उसके कामकाज पर पर्याप्त सार्वजनिक निगरानी न हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, मंदिर में आने वाले दान और उसके उपयोग की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे लोगों का विश्वास पूरी तरह कायम रहे।
उल्लेखनीय है कि राम मंदिर में दान से जुड़े कथित मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। इस मामले में जांच प्रक्रिया जारी है और संबंधित एजेंसियां तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।
फिलहाल, कांग्रेस के इन आरोपों पर केंद्र सरकार या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस बयान के संदर्भ में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।