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एथेनॉल पर भ्रामक खबरों पर कार्रवाई: मनीष कश्यप समेत 4 यूट्यूबर पर FIR दर्ज

नागपुर: सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के आरोप में यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत चार कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि इन लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और एथेनॉल नीति से जुड़े ऐसे दावे प्रसारित किए, जिन्हें संबंधित अधिकारियों ने तथ्यात्मक रूप […]

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manish kashyap
Gauravshali Bharat News
  • July 14, 2026 7:15 pm IST, Published 26 minutes ago

नागपुर: सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के आरोप में यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत चार कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि इन लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और एथेनॉल नीति से जुड़े ऐसे दावे प्रसारित किए, जिन्हें संबंधित अधिकारियों ने तथ्यात्मक रूप से भ्रामक बताया है। भाजपा सोशल मीडिया सेल, नागपुर शहर के अध्यक्ष शिशिर त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। नागपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित वीडियो और पोस्ट में किए गए दावे किन स्रोतों पर आधारित थे और क्या उन्हें बिना सत्यापन के प्रसारित किया गया। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इन सामग्रियों से आम लोगों के बीच भ्रम फैलने की स्थिति बनी या नहीं।

बताया जा रहा है कि जिन वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उनमें एथेनॉल से जुड़े सरकारी निर्णयों और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कथित बयानों को ऐसे रूप में प्रस्तुत किया गया, जिस पर संबंधित विभागों ने आपत्ति जताई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नागपुर साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर यूट्यूबर मनीष कश्यप, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर देसी बॉयज (desi_boysncr, हर्षित राठी और अंकलेश इनवाते (akkaspeaks)के खिलाफ केस दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद नागपुर पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुट गयी है।  जांच एजेंसियां अब डिजिटल साक्ष्यों, वीडियो सामग्री, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पड़ताल करेंगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित यूट्यूब चैनलों के संचालकों से पूछताछ भी की जा सकती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते प्रभाव के साथ कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। किसी भी सार्वजनिक नीति, सरकारी निर्णय या जनप्रतिनिधि से जुड़े दावों को प्रकाशित करने से पहले उनकी पुष्टि करना आवश्यक है। गलत या अपुष्ट जानकारी न केवल लोगों को भ्रमित कर सकती है, बल्कि कानूनन कार्रवाई का कारण भी बन सकती है।

हाल के वर्षों में फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। इसी क्रम में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने वाली सामग्री की तथ्यात्मक जांच भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने प्रमाणित हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

 

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