ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी कीमत कटौती का असर केवल एशियाई बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक कच्चे तेल के कारोबार और कीमतों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह फैसला विशेष महत्व रखता है, क्योंकि ये देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करते हैं।
सऊदी अरामको का यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की मांग, उत्पादन और भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। कंपनी की ओर से भारी छूट दिए जाने से अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों और निर्यातकों पर भी अपनी मूल्य नीति की समीक्षा करने का दबाव बढ़ सकता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो इससे आयात लागत घट सकती है और लंबे समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई तथा औद्योगिक लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतों में किसी बदलाव का फैसला कई अन्य आर्थिक और कर संबंधी कारकों पर भी निर्भर करेगा।
सऊदी अरामको की यह आक्रामक मूल्य रणनीति वैश्विक तेल बाजार में नए प्रतिस्पर्धी दौर की शुरुआत कर सकती है। आने वाले दिनों में अन्य प्रमुख तेल निर्यातक देशों की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।