नई दिल्ली: कांग्रेस ने सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध के प्रति संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध को सम्मान मिलना चाहिए और सरकार को संवाद के रास्ते समाधान तलाशना चाहिए।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी बात रखने के लिए ऐसे हालात का सामना नहीं करना चाहिए, जहां उसकी सेहत या जीवन पर जोखिम पैदा हो जाए। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद, सहमति और असहमति तीनों का सम्मान होना चाहिए।
पवन खेड़ा ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी मुद्दे पर लंबे समय तक विरोध जारी रहता है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह संबंधित पक्षों से बातचीत करे और समाधान निकालने का प्रयास करे। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध के तरीके ऐसे होने चाहिए, जिनसे उद्देश्य भी पूरा हो और किसी की जान को खतरा भी न हो।
कांग्रेस नेता का कहना था कि लोकतांत्रिक आंदोलनों की सफलता संवाद और जनसमर्थन से आती है। इसलिए राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को भी ऐसे रास्ते अपनाने चाहिए जो लंबे समय तक प्रभावी बने रहें और किसी प्रकार के स्वास्थ्य संकट का कारण न बनें।
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके आंदोलनों और अभियानों को लेकर देशभर में अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। इसी क्रम में कांग्रेस ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई है और सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पवन खेड़ा की टिप्पणी पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य और उनके आंदोलन से जुड़े मुद्दे बने हुए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच आगे कोई संवाद स्थापित होता है या नहीं।