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चांद पर जमीन बेचकर बना करोड़पति, 61.1 करोड़ एकड़ का दावा

नई दिल्ली। जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री धरती पर आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति चांद की जमीन बेचकर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दे? अमेरिका के डेनिस होप की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चांद पर अपना मालिकाना हक स्थापित किया और बाद में […]

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  • August 14, 2026 10:00 pm IST, Published 37 minutes ago

नई दिल्ली। जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री धरती पर आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति चांद की जमीन बेचकर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दे? अमेरिका के डेनिस होप की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चांद पर अपना मालिकाना हक स्थापित किया और बाद में उसकी जमीन के छोटे-छोटे हिस्से दुनिया भर के लोगों को बेचने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस कहानी में 61.1 करोड़ एकड़ से अधिक चंद्र भूमि बेचने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इस पूरी कहानी का सबसे अहम पहलू यह है कि चांद की जमीन की ऐसी निजी बिक्री को अंतरराष्ट्रीय कानून कानूनी स्वामित्व के रूप में मान्यता नहीं देता। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के विशेषज्ञों ने भी निजी व्यक्तियों द्वारा चांद पर संपत्ति के दावों को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना है।

बेरोजगारी के दौर में आया चांद पर जमीन बेचने का आइडिया

डेनिस होप का नाम ‘Lunar Embassy’ के जरिए चांद की जमीन बेचने के लिए चर्चित हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 1980 के आसपास उन्होंने 1967 के Outer Space Treaty की भाषा का अध्ययन किया और उसमें कथित तौर पर एक ‘कानूनी खामी’ देखी।

उनका तर्क था कि संधि देशों को चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों पर संप्रभुता का दावा करने से रोकती है, लेकिन इसमें निजी व्यक्तियों के स्वामित्व को लेकर स्पष्ट शब्द नहीं हैं। इसी व्याख्या के आधार पर उन्होंने चांद पर अपना दावा करने का रास्ता चुना। बाद में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और कुछ देशों को अपने दावे की जानकारी भेजने की बात कही।

होप की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि संबंधित सरकारों से उनके दावे पर तत्काल कोई कार्रवाई या स्वीकृति नहीं मिली। उन्होंने इस चुप्पी को अपने पक्ष में लिया और चांद की जमीन के प्लॉट बेचने का कारोबार शुरू कर दिया।

19.95 डॉलर में बेचते थे एक एकड़ जमीन

डेनिस होप के कारोबार को लेकर वर्षों से अलग-अलग कीमतें और बिक्री के आंकड़े सामने आते रहे हैं। पुरानी रिपोर्टों में एक एकड़ चंद्र भूमि की कीमत करीब 19.99 डॉलर बताई गई थी। कुछ अन्य रिपोर्टों में इससे अलग कीमतें भी दर्ज हैं।

खरीदारों को जमीन के नाम पर एक प्रमाणपत्र या डीड दी जाती थी। इसमें कथित तौर पर प्लॉट की पहचान और स्थान से संबंधित जानकारी शामिल होती थी। लोगों के लिए यह खरीद कानूनी जमीन खरीदने से ज्यादा एक अनोखी यादगार या चांद से जुड़ने का अनुभव बन गई।

यही वजह रही कि इस कारोबार ने दुनियाभर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कई लोगों ने चांद पर जमीन खरीदने के विचार को अनोखे उपहार और भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देखा।

61.1 करोड़ एकड़ बेचने का दावा कितना सही?

हालिया वायरल दावों में डेनिस होप की ओर से 611 मिलियन एकड़, यानी करीब 61.1 करोड़ एकड़ चंद्र भूमि बेचने की बात कही जा रही है। हाल की मीडिया रिपोर्टों ने भी इस आंकड़े को होप के दावे के तौर पर रिपोर्ट किया है।

लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि यह आंकड़ा कानूनी रूप से प्रमाणित जमीन की बिक्री का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि उनके कारोबार से जुड़ा दावा है। इसलिए इसे सीधे तौर पर वैध रियल एस्टेट बिक्री मानना सही नहीं होगा।

इसी तरह कुछ रिपोर्टों में मशहूर हस्तियों और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों के नाम भी चंद्र जमीन खरीदने वालों में बताए गए हैं। हालांकि, ऐसे प्रमाणपत्रों का होना यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चांद के उस हिस्से का वास्तविक मालिक बन गया।

अंतरराष्ट्रीय कानून चांद की जमीन के बारे में क्या कहता है?

इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 1967 की Outer Space Treaty है। इस संधि में बाहरी अंतरिक्ष, चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों को किसी देश द्वारा संप्रभुता के आधार पर अपने कब्जे में लेने पर रोक है।

अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों की संस्था International Institute of Space Law (IISL) ने भी चांद या अन्य खगोलीय पिंडों पर निजी संपत्ति के दावों को लेकर स्पष्ट चिंता जताई है। संस्था ने कहा है कि ऐसे ‘लूनर प्रॉपर्टी डीड’ लोगों को भ्रमित कर सकते हैं और निजी स्वामित्व के दावों का अंतरराष्ट्रीय कानून में आधार नहीं है।

इसका मतलब साफ है कि किसी व्यक्ति के पास चांद की जमीन का प्रमाणपत्र होने से उसे पृथ्वी पर किसी प्लॉट की तरह कानूनी मालिकाना हक हासिल नहीं हो जाता।

फिर लोग क्यों खरीदते हैं चांद की जमीन?

चांद की जमीन खरीदने के पीछे कानूनी से ज्यादा भावनात्मक और व्यावसायिक आकर्षण दिखाई देता है। कोई इसे अनोखा तोहफा मानता है तो कोई भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में संभावित निवेश के तौर पर देखता है।

हालांकि, विशेषज्ञों की राय में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के तहत ऐसे प्रमाणपत्र को वास्तविक संपत्ति के दस्तावेज की तरह देखना उचित नहीं है। IISL ने भी निजी चंद्र संपत्ति के दावों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई है।

कहानी में असली ट्विस्ट यही है

डेनिस होप की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उन्होंने एक ऐसी चीज को रियल एस्टेट की तरह पेश किया, जिस पर आम आदमी की कल्पना भी मुश्किल है। उन्होंने कथित कानूनी ‘लूपहोल’ की अपनी व्याख्या के आधार पर कारोबार शुरू किया और चांद की जमीन को प्रमाणपत्र के साथ बेचने का मॉडल तैयार किया।

लेकिन ‘चांद की जमीन खरीदना’ और ‘चांद पर कानूनी मालिकाना हक हासिल करना’ दो बिल्कुल अलग बातें हैं। खरीदार को मिला प्रमाणपत्र अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जमीन की मिल्कियत का प्रमाण नहीं माना जाता।

इसलिए वायरल हो रही 61.1 करोड़ एकड़ जमीन बेचने की कहानी भले ही हैरान करने वाली हो, लेकिन इसे चांद पर वास्तविक संपत्ति के मालिक बनने की खबर समझना गलत होगा। डेनिस होप ने एक असाधारण कारोबारी विचार जरूर खड़ा किया, मगर चांद की जमीन का कानूनी स्वामित्व आज भी किसी निजी व्यक्ति के पास मान्य नहीं है।

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