दिल्ली की जेलों में भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

तीन साल से एक ही जगह तैनात अधिकारियों का होगा तबादला नई दिल्ली। दिल्ली की जेलों में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और प्रशासनिक अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। अब एक ही स्थान पर तीन साल से अधिक समय से तैनात जेल अधिकारियों का तबादला किया जाएगा। […]

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  • November 3, 2026 9:56 am IST, Published 2 hours ago

तीन साल से एक ही जगह तैनात अधिकारियों का होगा तबादला

नई दिल्ली। दिल्ली की जेलों में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और प्रशासनिक अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। अब एक ही स्थान पर तीन साल से अधिक समय से तैनात जेल अधिकारियों का तबादला किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने जेल प्रशासन को ऐसे अधिकारियों की पहचान कर सूची तैयार करने और स्थानांतरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती रहने से अधिकारियों का प्रभाव बढ़ सकता है और अनियमितताओं की आशंका पैदा हो सकती है। ऐसे में नियमित तबादलों के माध्यम से जेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।

भ्रष्टाचार और वसूली पर सरकार की सख्ती

दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया है कि जेलों में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और लापरवाही के प्रति सरकार की नीति शून्य सहनशीलता की है। सरकार का उद्देश्य जेल व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और कैदियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, जेल प्रशासन से संवेदनशील विभागों में निर्धारित अवधि से अधिक समय से तैनात अधिकारियों का विवरण भी मांगा गया है। इसके आधार पर स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

दस साल का तैनाती रिकॉर्ड भी मांगा

सरकार ने भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे कुछ अधिकारियों की पिछले दस वर्षों की तैनाती का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। इसके अलावा जनसंपर्क अधिकारी, कारखाना और खरीद विभाग सहित विभिन्न संवेदनशील पदों पर तैनात अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

पहली बार अपराध करने वाले कैदियों, आर्थिक अपराधों में बंद आरोपितों और सिविल कैदियों से संबंधित जेलों में तैनात अधिकारियों का विवरण भी मांगा गया है। इस कदम का उद्देश्य संवेदनशील जिम्मेदारियों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा करना और संभावित अनियमितताओं की पहचान करना है।

कैदियों के भोजन और दवाओं की गुणवत्ता की होगी जांच

जेलों में कैदियों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और दवाओं की गुणवत्ता पर भी सरकार ने ध्यान केंद्रित किया है। अधिकारियों को इनके मानकों और बाजार दरों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कैदियों के लिए खरीदी जाने वाली खाद्य सामग्री और दवाओं की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। साथ ही, आपूर्ति और खरीद प्रक्रिया में संभावित वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने पर भी जोर दिया जाएगा।

प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक

जेलों के भीतर तंबाकू और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए आधुनिक जांच तकनीक अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसी स्कैनिंग तकनीक के इस्तेमाल की योजना है, जिससे प्रतिबंधित वस्तुओं का पता लगाया जा सके और जांच के दौरान किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।

इसके अतिरिक्त, जेलों में सुरक्षा संबंधी चूक, कर्मचारियों के दुर्व्यवहार और लंबित शिकायतों के मामलों में भी अधिकारियों से निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

गृह मंत्री आशीष सूद के अनुसार, वर्षों से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों का स्थानांतरण प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है। सरकार जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने, कैदियों के कल्याण को प्राथमिकता देने और शिकायतों का समयबद्ध निपटारा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दिल्ली सरकार की इस पहल से जेल प्रशासन में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थाओं की समीक्षा होने की उम्मीद है। हालांकि, इन कदमों का वास्तविक प्रभाव तब सामने आएगा, जब तबादलों के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और भ्रष्टाचार या लापरवाही की पुष्टि होने पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

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