नई दिल्ली: दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत-357 के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. दयानंद वत्स भारतीय ने नवनियुक्त दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य मंत्री Harsh Malhotra को बधाई देते हुए कहा है कि उनके सामने तत्काल कोई बड़ी राजनीतिक चुनौती नहीं है, लेकिन वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा साबित हो सकते हैं।
डॉ. वत्स ने कहा कि निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष Virendra Sachdeva के नेतृत्व में भाजपा ने 27 वर्षों बाद दिल्ली में सत्ता में वापसी कर ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का कार्य किया, जिसकी राजनीतिक हलकों में व्यापक सराहना हुई।
उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में भाजपा सरकार के प्रति जनता का दृष्टिकोण, संभावित एंटी-इंकम्बेंसी और विधायकों का क्षेत्रीय प्रदर्शन 2029 के चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि हर्ष मल्होत्रा उस समय तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं, तो उन्हें इन चुनौतियों का सीधे सामना करना पड़ेगा।
डॉ. वत्स ने दिल्ली देहात के 357 गांवों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि शहरी विस्तार सड़क (यूईआर-2) पर मुंडका में स्थापित टोल प्लाजा को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी है। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों को टोल लगाए जाने की जानकारी नहीं दी गई थी और बाद में टोल व्यवस्था लागू कर दी गई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल ने कई बार जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा से मुलाकात कर टोल हटाने या स्थानीय निवासियों को राहत देने की मांग की, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
डॉ. वत्स के अनुसार, टोल व्यवस्था के डिजिटलीकरण के बाद ग्रामीणों की असंतुष्टि और बढ़ी है। उनका मानना है कि यदि सरकार समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं करती है तो इसका असर दिल्ली देहात की अनेक विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है।
उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांग की कि मुंडका टोल प्लाजा के संबंध में ग्रामीणों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विकास और जनहित के मुद्दों का समाधान भाजपा के लिए भविष्य में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा।
डॉ. दयानंद वत्स भारतीय ने कहा कि सरकार यदि समय रहते ग्रामीणों की चिंताओं को दूर करती है तो स्थिति सकारात्मक हो सकती है, अन्यथा आगामी चुनावों में यह मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकता है।