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दिल्ली के सरकारी स्कूलों का होगा व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट, खामियों पर सीएम रेखा गुप्ता सख्त

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली सरकार राजधानी के सभी सरकारी स्कूलों का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों में मौजूद कमियों और जरूरी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑडिट के दौरान स्कूल भवनों की मजबूती और सुरक्षा की जांच की […]

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  • May 8, 2026 7:45 pm IST, Published 1 week ago

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली सरकार राजधानी के सभी सरकारी स्कूलों का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों में मौजूद कमियों और जरूरी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑडिट के दौरान स्कूल भवनों की मजबूती और सुरक्षा की जांच की जाएगी। साथ ही पीने के पानी, शौचालय, साफ-सफाई और फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार से निरीक्षण होगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एक सरकारी स्कूल का औचक निरीक्षण किया था। यहां बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया। निरीक्षण के दौरान मिली अव्यवस्थाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने शिक्षा मॉडल का खूब प्रचार किया, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरी काम नहीं किए।

मुख्यमंत्री ने सुबह रूपनगर नंबर चार स्थित राजकीय सर्वोदय विद्यालय का औचक निरीक्षण कर स्कूल परिसर की व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और उनसे पानी की व्यवस्था, फायर सेफ्टी, शौचालयों की स्थिति, साफ-सफाई, गर्मी से राहत के इंतजाम, शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि स्कूल में साफ पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। वाटर कूलर और आरओ सिस्टम लंबे समय से खराब पड़े हैं, इसकी वजह से अधिकतर छात्र सीधे नल का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब है। कई टॉयलेट्स के दरवाजे टूटे हुए हैं। उनमें नियमित सफाई नहीं होती। शौचालयों में नियमित पानी की आपूर्ति भी नहीं होती।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान पाया कि स्कूल का फायर सेफ्टी सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था। इन अनियमितताओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूल की सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं में तत्काल प्रभाव से सुधार किया जाए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के सामने शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा के मंदिर होते हैं। शिक्षा व्यवस्था में संवेदनशीलता, जवाबदेही और विद्यार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है। इसी उद्देश्य से सभी सरकारी स्कूलों का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा ताकि स्कूलों में मौजूद आधारभूत कमियों और आवश्यक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली के लगभग 700 स्कूलों में नए भवनों और बड़े स्तर पर पुनर्विकास की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई स्कूलों के भवन 40 से 50 वर्ष पुराने हैं। अब उनकी स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है। इस ऑडिट के माध्यम से इन स्कूलों के भवनों की मजबूती, पीने के पानी की व्यवस्था, शौचालय, स्वच्छता और फायर सेफ्टी जैसी मूलभूत सुविधाओं की जांच की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को आदेश जारी किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्ववर्ती सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले वर्षों में शिक्षा मॉडल का बड़े स्तर पर प्रचार किया गया। लेकिन जमीनी हकीकत अब सरकारी स्कूलों की स्थिति देखकर सामने आ रही है। अगर पूर्व की सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को वास्तव में मजबूत किया होता तो आज बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए शिकायत नहीं करनी पड़ती। केवल विज्ञापन और प्रचार से शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं बनती, बल्कि स्कूलों में वास्तविक सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार दिखावे की राजनीति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत करने के लिए ठोस और परिणाम आधारित कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी सरकार पिछले एक वर्ष से सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में साफ पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल सुविधाएं और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है।

 

 

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