नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रही आगजनी की घटनाओं और हाल के बड़े हादसों के बाद दिल्ली सरकार फायर सेफ्टी को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार दिल्ली के बिल्डिंग बायलॉज में व्यापक बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अब केवल ऊंची इमारतें ही नहीं, बल्कि हर घर, स्वतंत्र मकान, बिल्डर फ्लोर और लो-राइज अपार्टमेंट भी फायर सेफ्टी नियमों के दायरे में आ सकते हैं। प्रस्तावित बदलावों में प्रत्येक घर में स्मोक डिटेक्टर लगाना अनिवार्य किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
दिल्ली में बीते कुछ महीनों के दौरान कई दर्दनाक अग्निकांड सामने आए हैं। इनमें अनेक लोगों की जान गई और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। हाल ही में मुस्तफाबाद इलाके में हुए भीषण हादसे ने सरकार और प्रशासन को झकझोर दिया। इसके बाद राजधानी में फायर सेफ्टी व्यवस्था की समीक्षा शुरू की गई और पाया गया कि बड़ी संख्या में आवासीय भवन ऐसे हैं जहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम मौजूद नहीं हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार अब फायर सेफ्टी नियमों को आम लोगों के घरों तक पहुंचाने की योजना बना रही है। वर्तमान में फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) और अन्य सुरक्षा मानक मुख्य रूप से हाईराइज इमारतों तथा व्यावसायिक भवनों पर लागू होते हैं, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले मकानों और आवासीय परिसरों को भी सुरक्षा मानकों के दायरे में लाया जा सकता है।
दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने संकेत दिए हैं कि सरकार मौजूदा नियमों की गहन समीक्षा कर रही है। उनका कहना है कि आग लगने की घटनाएं केवल बहुमंजिला इमारतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे मकानों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी अक्सर ऐसे हादसे होते हैं। ऐसे में फायर सेफ्टी को लेकर व्यापक और प्रभावी व्यवस्था विकसित करना समय की मांग है।
प्रस्तावित नियमों के तहत घरों में स्मोक डिटेक्टर लगाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्मोक डिटेक्टर ऐसा उपकरण है जो धुएं का पता चलते ही अलार्म बजाकर लोगों को आग लगने की शुरुआती अवस्था में ही सचेत कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश अग्निकांडों में जान-माल का बड़ा नुकसान इसलिए होता है क्योंकि लोगों को समय पर खतरे की जानकारी नहीं मिल पाती। यदि घरों में स्मोक डिटेक्टर लगे हों तो लोग तुरंत बाहर निकल सकते हैं और दमकल विभाग को भी समय रहते सूचना मिल सकती है।
सरकार बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन कर फायर सेफ्टी को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत नए निर्माणों में सुरक्षा उपकरणों को अनिवार्य किया जा सकता है, जबकि पुराने भवनों के लिए भी चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा सकती है। अधिकारियों का मानना है कि इससे भविष्य में आग से होने वाले हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में आग की घटनाएं तेजी से फैल सकती हैं। संकरी गलियां, अवैध निर्माण, बिजली के तारों का जाल और सुरक्षा उपकरणों की कमी जोखिम को और बढ़ा देती है। ऐसे में केवल दमकल विभाग पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक घर को सुरक्षा की पहली इकाई बनाना जरूरी है। यही कारण है कि सरकार अब व्यक्तिगत स्तर पर सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसके अलावा दिल्ली सरकार फायर सेफ्टी ऑडिट की व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी में है। भवनों की नियमित जांच, सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता की समीक्षा और नियमों के पालन की निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से भी सुरक्षा मानकों का पालन हो।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो दिल्ली देश का ऐसा प्रमुख महानगर बन सकता है जहां आवासीय भवनों के लिए फायर सेफ्टी को व्यापक स्तर पर अनिवार्य बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह कदम लोगों की जान बचाने और आग से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है, जिस पर पूरे दिल्लीवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।