नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी के रूप में नियुक्त आईएफएस अधिकारी निधि तिवारी इन दिनों चर्चा में हैं। उनकी कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने विज्ञान की दुनिया में वैज्ञानिक के रूप में करियर शुरू किया, लेकिन आगे चलकर भारतीय विदेश सेवा में जगह बनाई और अब प्रधानमंत्री कार्यालय में बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मार्च 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था। वह 2014 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं और इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में डिप्टी सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रही थीं।
BARC में वैज्ञानिक से शुरू हुआ सफर
निधि तिवारी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि विज्ञान से जुड़ी रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) पहुंचीं, जहां उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में उच्च शिक्षा हासिल की और गोल्ड मेडल प्राप्त किया। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव शोध और विज्ञान के क्षेत्र की ओर बढ़ा।
उच्च शिक्षा के बाद उनका चयन भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में हुआ। उन्होंने वहां वैज्ञानिक के तौर पर काम किया। यानी जिस अधिकारी को आज प्रधानमंत्री के कार्यालय में महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी निभाते देखा जा रहा है, उनके करियर की शुरुआत वैज्ञानिक क्षेत्र से हुई थी।
वैज्ञानिक नौकरी के बाद चुनी प्रशासन की राह
निधि तिवारी की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू उनका करियर बदलाव है। वैज्ञानिक के रूप में काम करने के बावजूद उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाने का था। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने यूपीपीएससी की परीक्षा भी दी और सहायक आयुक्त के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की।
साल 2013 में आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 96वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ। वह 2014 बैच की IFS अधिकारी बनीं। इस तरह विज्ञान और शोध की पृष्ठभूमि रखने वाली निधि ने कूटनीति और प्रशासन के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाई।
विदेश मंत्रालय में संभाली अहम जिम्मेदारियां
IFS में चयन के बाद निधि तिवारी ने विदेश मंत्रालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों से जुड़े डिवीजन में काम किया। यह क्षेत्र भारत की रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी विदेश नीति से जुड़ा बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इस दौरान उनका काम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से संबंधित रहा।
विदेश मंत्रालय में काम करने के दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों की गहरी समझ विकसित करने का अवसर मिला। यही अनुभव आगे चलकर प्रधानमंत्री कार्यालय में उनकी भूमिका के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
PMO में पहुंचकर बढ़ी जिम्मेदारी
निधि तिवारी नवंबर 2022 के आसपास प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह PMO में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थीं। यहां उन्होंने विदेश और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर काम किया। इसी दौरान उनका काम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से जुड़े वर्टिकल से भी जुड़ा रहा।
प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करते हुए विदेश नीति, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों का अनुभव उनकी प्रोफाइल को और महत्वपूर्ण बनाता गया। इसके बाद मार्च 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद हुई।
कौन हैं निधि तिवारी, क्यों हो रही चर्चा?
निधि तिवारी के बारे में लोगों की दिलचस्पी सिर्फ इसलिए नहीं है कि वह प्रधानमंत्री की प्राइवेट सेक्रेटरी बनी हैं। उनकी पूरी प्रोफेशनल यात्रा अपने आप में काफी अलग है। एक तरफ बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई, दूसरी तरफ BARC में वैज्ञानिक के रूप में काम और फिर सिविल सेवा के रास्ते भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश—यह बदलाव उन्हें अलग पहचान देता है।
इसके बाद विदेश मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े काम और प्रधानमंत्री कार्यालय में विदेश एवं सुरक्षा मामलों से जुड़ी जिम्मेदारी ने उनके अनुभव को और व्यापक बनाया। यही वजह है कि प्रधानमंत्री की प्राइवेट सेक्रेटरी के पद पर उनकी नियुक्ति को उनके लंबे प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव से जोड़कर देखा गया।
PM मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी बनने तक का सफर
निधि तिवारी के करियर को अगर क्रमवार देखें तो उनकी यात्रा कई अहम पड़ावों से होकर गुजरी है। विज्ञान की पढ़ाई से शुरुआत, BARC में वैज्ञानिक का अनुभव, प्रशासनिक सेवा की तैयारी, सिविल सेवा परीक्षा में सफलता, IFS में चयन, विदेश मंत्रालय में रणनीतिक मामलों पर काम और फिर PMO तक पहुंचना—उनके करियर की प्रमुख कड़ियां हैं।
2025 में प्रधानमंत्री मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त होने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आईं। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें PMO की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभालने वाली अधिकारियों में शामिल बताया गया है।
युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक कहानी
निधि तिवारी की यात्रा यह दिखाती है कि करियर की दिशा बदलने के बावजूद लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। विज्ञान और शोध के क्षेत्र में शुरुआत करने के बाद उन्होंने प्रशासन और कूटनीति को अपना रास्ता बनाया। UPSC में सफलता हासिल कर IFS बनने के बाद उन्होंने विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों में अनुभव प्राप्त किया और अंततः प्रधानमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचीं।
उनकी कहानी खास तौर पर उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक मानी जा सकती है जो अपने करियर में बदलाव करना चाहते हैं या किसी एक क्षेत्र में शुरुआत करने के बाद आगे नई दिशा चुनने का फैसला करते हैं। निधि तिवारी का सफर बताता है कि मजबूत शैक्षणिक आधार, लगातार तैयारी और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता से करियर में बड़े बदलाव संभव हैं।
निधि तिवारी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी बनना उनके लंबे और विविधतापूर्ण करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। BARC की वैज्ञानिक से लेकर IFS अधिकारी और फिर PMO की अहम जिम्मेदारी तक पहुंचने की उनकी यात्रा ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। उनकी नियुक्ति के पीछे विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों में उनके अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।