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दिल्ली के गफ्फार मार्केट से चोरी के मोबाइल अनलॉक कर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली : पूर्वी दिल्ली जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने चोरी किए गए मोबाइल फोन खरीदकर उन्हें अनलॉक कर दोबारा बाजार में बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, मोबाइल मदरबोर्ड, एक लैपटॉप […]

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  • June 14, 2026 12:15 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली : पूर्वी दिल्ली जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने चोरी किए गए मोबाइल फोन खरीदकर उन्हें अनलॉक कर दोबारा बाजार में बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, मोबाइल मदरबोर्ड, एक लैपटॉप तथा मोबाइल सुरक्षा प्रणाली को बायपास करने वाले विशेष उपकरण बरामद किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह राजधानी सहित विभिन्न राज्यों से चोरी हुए मोबाइल फोन कम कीमत पर खरीदता था। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर और तकनीकी उपकरणों की मदद से मोबाइल फोन की सुरक्षा प्रणाली को हटाकर उन्हें नए फोन की तरह बाजार में बेच दिया जाता था। इस अवैध कारोबार से गिरोह लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहा था।

डीसीपी पूर्वी दिल्ली राजीव कुमार ने बताया कि मोबाइल चोरी के मामलों की जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि दिल्ली के प्रसिद्ध गफ्फार मार्केट में कुछ लोग चोरी के मोबाइल फोन खरीदकर उन्हें अनलॉक करने और दोबारा बेचने का काम कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद स्पेशल स्टाफ टीम ने मामले की गहन जांच शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी।

जांच के दौरान पुलिस को करोल बाग स्थित एक मोबाइल रिपेयरिंग और सॉफ्टवेयर सेंटर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने योजना बनाकर संबंधित प्रतिष्ठान पर छापेमारी की। छापे के दौरान दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया और मौके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया गया।

बरामद सामान में 45 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 22 मोबाइल फोन मदरबोर्ड, एक लैपटॉप तथा मोबाइल सुरक्षा लॉक हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला चीनी एन्प्रो (Enpro) टूल शामिल है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन उपकरणों का उपयोग मोबाइल फोन की सुरक्षा प्रणाली को तोड़ने और डाटा लॉक हटाने के लिए किया जाता था।

पुलिस के अनुसार, आरोपी चोरी के मोबाइल फोन खरीदने के बाद उनका आईएमईआई और अन्य तकनीकी विवरण बदलने का प्रयास करते थे ताकि फोन की पहचान न हो सके। इसके बाद इन मोबाइलों को मरम्मत किए गए या सेकेंड हैंड फोन के रूप में ग्राहकों को बेच दिया जाता था। इससे न केवल चोरी को बढ़ावा मिलता था बल्कि मोबाइल खरीदने वाले लोगों को भी धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ता था।

पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चोरी के मोबाइल फोन उन्हें कहां से मिलते थे और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। जांच एजेंसियां गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल चोरी के मामलों में इस प्रकार के गिरोह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चोरी किए गए मोबाइल फोन का आसानी से खरीदार मिल जाने के कारण अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है। ऐसे में इस नेटवर्क पर कार्रवाई से मोबाइल चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे मोबाइल फोन खरीदते समय उसके बिल, आईएमईआई नंबर और विक्रेता की विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध रूप से कम कीमत पर मोबाइल बेचने का प्रस्ताव देता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।

फिलहाल दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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