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NEET-UG पेपर लीक में बड़ा खुलासा! CBI चार्जशीट ने खोले चौंकाने वाले राज

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने कई ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक किसी प्रिंटिंग प्रेस से नहीं हुआ, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी […]

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  • August 7, 2026 10:00 pm IST, Published 54 minutes ago

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने कई ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक किसी प्रिंटिंग प्रेस से नहीं हुआ, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के लिए काम कर रहे कुछ विषय विशेषज्ञों (Experts) के माध्यम से हुआ। CBI का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में तकनीक, होटल मीटिंग, कोचिंग संस्थानों और डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, NTA से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों पर प्रश्नपत्र लीक कराने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से पहले एक होटल में प्रश्नपत्र को दोबारा तैयार किया गया, जहां मूल प्रश्नों के आधार पर संभावित पेपर तैयार कर उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया।

85 प्रतिशत तक प्रश्न मिले समान

CBI की चार्जशीट के मुताबिक, जिन छात्रों तक लीक पेपर पहुंचा था, उसमें मौजूद लगभग 85 प्रतिशत प्रश्न वास्तविक NEET-UG परीक्षा से मेल खाते थे। यही वजह रही कि जांच एजेंसी ने इस मामले को संगठित आपराधिक साजिश मानते हुए कई डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को अपने कब्जे में लिया।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले कोचिंग सेंटरों में संभावित प्रश्न लिखवाए गए थे। बाद में परीक्षा में वही या उनसे मिलते-जुलते प्रश्न पूछे गए, जिससे पूरे नेटवर्क पर शक और गहरा हो गया।

सोसायटी मैनेजमेंट ऐप बना सबसे बड़ा सुराग

CBI को जांच के दौरान सबसे अहम सुराग एक सोसायटी मैनेजमेंट ऐप से मिला। एजेंसी ने इस ऐप में दर्ज एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड, विजिटर लॉग और होटल तथा फ्लैट में आने-जाने के डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इन रिकॉर्ड्स को मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से मिलाया गया।

इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर CBI ने आरोपियों की गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार की और यह पता लगाया कि परीक्षा से पहले किन-किन लोगों के बीच संपर्क हुआ था।

होटल में हुई थी गोपनीय बैठक

चार्जशीट के अनुसार, पेपर लीक की साजिश को अंजाम देने के लिए एक होटल में बैठक हुई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि यहीं पर प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए और बाद में उन्हें चुनिंदा लोगों तक पहुंचाया गया। होटल के CCTV फुटेज, विजिटर रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

प्रिंटिंग प्रेस से नहीं हुआ लीक

जांच का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह रहा कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से लीक नहीं हुआ। शुरुआती आशंकाओं के विपरीत CBI को ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले, जिससे यह साबित हो कि प्रिंटिंग प्रक्रिया में किसी प्रकार की सेंध लगी थी। एजेंसी का कहना है कि लीक की शुरुआत प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों के स्तर पर हुई।

डिजिटल फॉरेंसिक ने खोली परतें

CBI ने इस मामले में आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल किया। मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की जांच के बाद एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण कड़ियां जोड़ीं। डिजिटल सबूतों ने यह स्पष्ट करने में मदद की कि आरोपियों के बीच किस समय और किस प्रकार संपर्क हुआ।

परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

इस खुलासे के बाद देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों पर निगरानी और जवाबदेही मजबूत नहीं की गई, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की आशंका बनी रह सकती है।

CBI की जांच जारी

CBI ने चार्जशीट में कई आरोपियों के नाम शामिल किए हैं और जांच अभी भी जारी है। एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। यदि जांच में नए सबूत सामने आते हैं तो पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।

NTA की साख पर असर

NEET-UG देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है, जिसमें हर वर्ष लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में इस तरह के खुलासे ने NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।

अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता

इस मामले के सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं और ऐसे मामलों से ईमानदार उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित होता है। शिक्षा जगत से जुड़े लोग निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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