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IAS-IPS टकराव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: रोहिणी सिंधुरी और डी. रूपा विवाद सुलझाने के लिए पूर्व जज को सौंपी जिम्मेदारी

नई दिल्ली : कर्नाटक कैडर की दो चर्चित महिला अधिकारियों, आईएएस रोहिणी सिंधुरी और आईपीएस डी. रूपा मौदगिल के बीच पिछले तीन वर्षों से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लगातार अदालतों में चल रही कानूनी लड़ाई से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को आपसी मतभेद खत्म करने और सुलह […]

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  • June 13, 2026 7:59 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली : कर्नाटक कैडर की दो चर्चित महिला अधिकारियों, आईएएस रोहिणी सिंधुरी और आईपीएस डी. रूपा मौदगिल के बीच पिछले तीन वर्षों से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लगातार अदालतों में चल रही कानूनी लड़ाई से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को आपसी मतभेद खत्म करने और सुलह का रास्ता अपनाने की सलाह दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया है, जो दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावनाएं तलाशेंगे।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों अधिकारी देश की प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवाओं का हिस्सा हैं और उन्हें सार्वजनिक सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अदालत ने कहा कि वर्षों से चली आ रही यह कानूनी लड़ाई न केवल दोनों अधिकारियों के करियर को प्रभावित कर रही है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।

आखिर क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद वर्ष 2023 में उस समय सार्वजनिक रूप से सामने आया था, जब आईपीएस अधिकारी डी. रूपा मौदगिल ने सोशल मीडिया पर आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। रूपा ने दावा किया था कि रोहिणी सिंधुरी ने कुछ निजी तस्वीरें विभिन्न अधिकारियों को भेजी थीं। उन्होंने रोहिणी के आचरण और प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे।

इन आरोपों के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और दोनों अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। रोहिणी सिंधुरी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, भ्रामक और मानहानिकारक बताते हुए डी. रूपा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई मुकदमे और शिकायतें दर्ज कराईं, जिससे विवाद और गहरा गया।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

विवाद से जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर्नाटक हाईकोर्ट में भी हुई। रोहिणी सिंधुरी ने कुछ कानूनी कार्यवाहियों को चुनौती दी थी, लेकिन राहत नहीं मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। वहीं डी. रूपा भी अपने पक्ष को लेकर अदालतों का दरवाजा खटखटाती रहीं।

पिछले तीन वर्षों में दोनों अधिकारियों के बीच कानूनी संघर्ष लगातार जारी रहा, जिसके चलते कई बार अदालतों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इस दौरान सोशल मीडिया पोस्ट, मानहानि के मुकदमे और विभिन्न प्रशासनिक शिकायतें भी विवाद का हिस्सा बनीं।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में अनुभवी और सम्मानित पदों पर कार्य कर चुकी हैं। ऐसे में लगातार मुकदमेबाजी करना उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि दोनों पक्ष इसी तरह कानूनी लड़ाई लड़ते रहे तो इससे उनका पेशेवर भविष्य प्रभावित हो सकता है।

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों से समाज बेहतर उदाहरण की अपेक्षा करता है। ऐसे मामलों का समाधान अदालतों के बजाय बातचीत और आपसी समझ से होना अधिक उचित होगा।

जस्टिस कुरियन जोसेफ करेंगे मध्यस्थता

मामले को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों को जुलाई में उनके समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद समाप्त करने का अवसर दिया जाएगा।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर कुछ मामलों की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगाने का संकेत भी दिया है, ताकि सुलह प्रक्रिया बिना किसी दबाव के आगे बढ़ सके।

पहले भी हुई थी समझौते की कोशिश

यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने दोनों अधिकारियों को समझौते की सलाह दी हो। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को विवाद समाप्त करने का अवसर दिया था। उस दौरान डी. रूपा ने कुछ सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर सहमति जताई थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया और मामला फिर अदालत पहुंच गया।

अब क्या होगा आगे?

अब इस हाई-प्रोफाइल विवाद का भविष्य मध्यस्थता प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि दोनों अधिकारी आपसी सहमति से समाधान निकालने में सफल रहती हैं, तो तीन वर्षों से चली आ रही कानूनी और सार्वजनिक लड़ाई समाप्त हो सकती है। वहीं समझौता न होने की स्थिति में मामला फिर से अदालत में सुनवाई के लिए आ सकता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ है कि वह इस विवाद का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान चाहता है। न्यायालय की पहल से उम्मीद की जा रही है कि कर्नाटक प्रशासन की दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद जल्द समाप्त हो सकता है और दोनों अधिकारी अपने पेशेवर दायित्वों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।

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