नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 का समापन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) रंगमंडल की प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति ‘लौह पुरुष’ के साथ हुआ। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव की समापन प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय इतिहास, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणादायक गाथा से रूबरू कराया। सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और योगदान पर आधारित इस नाटक ने मंच पर भारत की एकता और अखंडता के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
महोत्सव की थीम ‘साझी कहानियां, साझा भविष्य’ (Shared Stories, Shared Futures) के अनुरूप इस प्रस्तुति ने रंगमंच को विभिन्न देशों की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और साझा मानवीय मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया। कमानी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विदेशी रंगकर्मियों, राजनयिकों और दिल्ली के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
चितरंजन त्रिपाठी के निर्देशन में जीवंत हुई सरदार पटेल की गाथा
‘लौह पुरुष’ नाटक की परिकल्पना, डिजाइन, निर्देशन और संगीत की जिम्मेदारी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने संभाली। उनके निर्देशन में सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन के विभिन्न पहलुओं को आधुनिक रंगमंचीय शैली और भावनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से मंच पर प्रस्तुत किया गया।
नाटक में सरदार पटेल के संघर्ष, राजनीतिक दृढ़ता, नेतृत्व क्षमता और स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों के एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को प्रमुखता दी गई। प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि राष्ट्र निर्माण केवल राजनीतिक निर्णयों का परिणाम नहीं होता, बल्कि इसके पीछे दूरदृष्टि, साहस, समर्पण और मजबूत इच्छाशक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निर्देशन में दृश्यात्मक प्रयोगों, संगीत, संवाद और अभिनय का संतुलित संयोजन देखने को मिला। इसके माध्यम से दर्शकों को सरदार पटेल के व्यक्तित्व के साथ-साथ उस ऐतिहासिक दौर की परिस्थितियों को समझने का अवसर मिला, जब स्वतंत्र भारत के सामने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती थी।
अवधू आजाद की अनूठी भूमिका बनी आकर्षण का केंद्र
इस नाट्य प्रस्तुति का एक प्रमुख आकर्षण एनएसडी रंगमंडल के टेक्निकल कोऑर्डिनेटर अवधू आजाद की भूमिका रही। उन्होंने नाटक में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का रूप धारण कर सरदार पटेल की ऐतिहासिक विरासत और उनके विचारों की स्थायी प्रासंगिकता को प्रतीकात्मक तरीके से प्रस्तुत किया।
तकनीकी विभाग से जुड़े अवधू आजाद का मंच पर इस तरह सामने आना प्रस्तुति का विशिष्ट पक्ष रहा। उनके मूक, स्थिर और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस दृश्य के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आया कि सरदार पटेल की विरासत केवल एक विशाल प्रतिमा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके विचार आज भी देश की एकता, अखंडता और सामूहिक चेतना से जुड़े हुए हैं।
रंगमंच में तकनीकी और रचनात्मक पक्षों के बीच तालमेल किसी भी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाता है। अवधू आजाद की इस भूमिका ने कलाकारों और तकनीकी सहयोगियों के साझा योगदान को भी रेखांकित किया।
राजेश सिंह और प्रतीक वढेरा ने निभाई सरदार पटेल की भूमिका
‘लौह पुरुष’ में सरदार वल्लभभाई पटेल की मुख्य भूमिका राजेश सिंह और प्रतीक वढेरा ने निभाई। दोनों अभिनेताओं ने पटेल के जीवन के अलग-अलग चरणों और व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को मंच पर प्रस्तुत किया।
प्रस्तुति में एक युवा और दृढ़ निश्चयी वकील से लेकर राष्ट्रीय एकीकरण के महत्वपूर्ण शिल्पकार बनने तक की यात्रा को उकेरने का प्रयास किया गया। दोनों कलाकारों ने अपने संवादों, शारीरिक हाव-भाव और अभिनय के माध्यम से सरदार पटेल की दृढ़ता, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त किया।
दो अभिनेताओं के माध्यम से एक ही ऐतिहासिक व्यक्तित्व के अलग-अलग पक्षों को प्रस्तुत करने की शैली ने नाटक को विशिष्ट रंगमंचीय आयाम दिया। इससे दर्शकों को सरदार पटेल के व्यक्तित्व और उनके ऐतिहासिक योगदान को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखने का अवसर मिला।
अंतरराष्ट्रीय रंगकर्मियों की मौजूदगी ने बढ़ाई महोत्सव की गरिमा
कमानी सभागार में आयोजित समापन समारोह में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। आयोजकों की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में 100 से अधिक विदेशी रंगकर्मी, राजनयिक और दिल्ली के गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
भारत के अलावा रूस, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस आयोजन के अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
थिएटर फेस्टिवल जैसे आयोजन विभिन्न देशों के कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, रचनात्मक प्रयोगों और सामाजिक अनुभवों को साझा करने का मंच प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रम कला के माध्यम से संवाद को बढ़ावा देने और अलग-अलग समाजों के बीच सांस्कृतिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘साझी कहानियां, साझा भविष्य’ की थीम के तहत ‘लौह पुरुष’ की प्रस्तुति ने भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण गाथा को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर सामने रखा।
समापन पर गूंजे भारत माता की जय के नारे
नाटक के समापन के बाद सभागार में मौजूद दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सभागार में ‘भारत माता की जय’ और ‘सरदार पटेल अमर रहें’ के नारे गूंजे। दर्शकों की प्रतिक्रिया ने प्रस्तुति के भावनात्मक प्रभाव और सरदार पटेल के प्रति सम्मान को प्रदर्शित किया।
समापन प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर आधारित नाटक केवल अतीत की घटनाओं को दोहराने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को इतिहास, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
‘लौह पुरुष’ नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक: चितरंजन त्रिपाठी
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक और नाटक के निर्देशक चितरंजन त्रिपाठी ने प्रस्तुति के महत्व पर कहा, “लौह पुरुष सिर्फ एक नाटक नहीं, यह नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। अवधू आजाद जैसे तकनीकी साथी का मंच पर आना यह दिखाता है कि रंगमंडल एक परिवार है।”
उनके इस वक्तव्य में रंगमंच के सामूहिक स्वरूप और पर्दे के पीछे काम करने वाले सहयोगियों के महत्व को रेखांकित किया गया। किसी भी नाट्य प्रस्तुति की सफलता में निर्देशक और अभिनेताओं के साथ-साथ तकनीकी दल, डिजाइन टीम और संगीत से जुड़े कलाकारों की भी अहम भूमिका होती है।
‘लौह पुरुष’ के माध्यम से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल ने सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को समकालीन रंगमंचीय भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इस प्रस्तुति ने ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 के समापन को एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव में बदल दिया।
तीन दिवसीय महोत्सव का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि विभिन्न देशों की कहानियां, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराएं अलग-अलग होने के बावजूद साझा भविष्य की कल्पना को मजबूत कर सकती हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर आधारित ‘लौह पुरुष’ ने राष्ट्रीय एकता, दृढ़ नेतृत्व और सामूहिक प्रयास के महत्व को केंद्र में रखते हुए इस विचार को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
प्रेषक: रंगमंडल, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय।