नई दिल्ली। देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले लाखों सैन्यकर्मियों के लिए केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण पहल पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत देश के लगभग 14 लाख सक्रिय रक्षा कर्मियों के पात्र निजी वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स से छूट देने की व्यवस्था तैयार की जा सकती है। इस संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच बातचीत शुरू हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मंत्रालय और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मंत्रालय के बीच इस व्यवस्था को लेकर विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और न ही इसके लागू होने की तारीख घोषित की गई है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी डिजिटल व्यवस्था तैयार करना है, जिससे पात्र सैन्यकर्मियों के निजी वाहनों की पहचान बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के हो सके और उन्हें टोल भुगतान या ई-चालान जैसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
MLFF टोल सिस्टम बना सैन्यकर्मियों के लिए चुनौती
दरअसल, देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर आधुनिक मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने, लंबी कतारों और यातायात की देरी को समाप्त करना है।
पारंपरिक टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को टोल बूथ पर रुकना पड़ता है। वहां मौजूद कर्मचारी फास्टैग या अन्य दस्तावेजों के आधार पर टोल शुल्क की प्रक्रिया पूरी करते हैं। लेकिन MLFF व्यवस्था में वाहनों को रोके बिना ही उनकी पहचान की जाती है।
इसके लिए राजमार्गों पर विशेष गैन्ट्री, हाई-टेक कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर लगाए जाते हैं। ये उपकरण वाहन की नंबर प्लेट और FASTag की पहचान करके निर्धारित टोल शुल्क की प्रक्रिया पूरी करते हैं।
यही तकनीकी बदलाव रक्षा कर्मियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। मौजूदा व्यवस्था में पात्र सैन्यकर्मी निर्धारित नियमों और पहचान संबंधी दस्तावेजों के आधार पर टोल छूट का दावा कर सकते हैं। लेकिन MLFF सिस्टम में किसी कर्मचारी के सामने पहचान पत्र दिखाने की सुविधा नहीं होती। ऐसे में यदि वाहन का छूट संबंधी विवरण डिजिटल सिस्टम में दर्ज नहीं है, तो टोल भुगतान नहीं होने पर ई-चालान जारी हो सकता है।
14 लाख सक्रिय रक्षा कर्मियों को मिल सकता है लाभ
प्रस्तावित योजना का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों में लगभग 14 लाख सक्रिय सैन्यकर्मी कार्यरत हैं। इनमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान तथा अधिकारी शामिल हैं।
यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले सैन्यकर्मियों के निजी वाहनों को टोल छूट की डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं है, बल्कि सैन्यकर्मियों को राजमार्गों पर अनावश्यक परेशानी से बचाना भी है। कई सैन्यकर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनाती, छुट्टी या आधिकारिक कार्यों के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में टोल छूट की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होने से उन्हें सुविधा मिल सकती है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रस्ताव का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक सैन्यकर्मी की हर निजी यात्रा स्वतः टोल मुक्त हो जाएगी। मौजूदा नियमों में निजी वाहनों पर छूट निर्धारित शर्तों और आधिकारिक उपयोग से जुड़ी है। नई व्यवस्था में पात्रता के नियम क्या होंगे, यह अंतिम सरकारी निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
FASTag के जरिए छूट देने के दो विकल्पों पर चर्चा
सरकार इस समस्या का समाधान निकालने के लिए मुख्य रूप से दो विकल्पों पर विचार कर रही है।
पहला विकल्प: विशेष FASTag या डिजिटल पास
एक प्रस्ताव के अनुसार, पात्र रक्षा कर्मियों के निजी वाहनों को FASTag आधारित विशेष सुविधा दी जा सकती है। इसके तहत वाहन की पहचान डिजिटल तरीके से होगी और निर्धारित पात्रता के अनुसार टोल शुल्क से छूट मिल सकेगी।
एक विकल्प यह भी है कि सामान्य वार्षिक पास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उसका खर्च रक्षा मंत्रालय द्वारा वहन या प्रतिपूर्ति किया जाए। हालांकि, इस खर्च की जिम्मेदारी किस मंत्रालय की होगी, इस पर अभी सहमति बनना बाकी है।
दूसरा विकल्प: अलग श्रेणी का FASTag
दूसरे विकल्प में ऐसे FASTag की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, जो वाहन की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड तो रखेगा, लेकिन पात्र वाहन से टोल शुल्क नहीं काटेगा।
इस व्यवस्था का फायदा यह होगा कि वाहन की पहचान अपने आप हो जाएगी। टोल प्रबंधन प्रणाली को भी पता रहेगा कि संबंधित वाहन छूट की श्रेणी में आता है। इससे वाहन चालक को बार-बार अपनी पात्रता साबित करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
फिलहाल दोनों विकल्पों पर विचार-विमर्श जारी है। अंतिम निर्णय तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय खर्च और पात्रता के नियमों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
2028 तक 1,150 टोल प्लाजा पर MLFF लागू करने का लक्ष्य
केंद्र सरकार देशभर में हाईवे यात्रा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल टोलिंग व्यवस्था का विस्तार कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक देश के लगभग 1,150 टोल प्लाजा को MLFF सिस्टम के दायरे में लाने का लक्ष्य है।
इस तकनीक के व्यापक इस्तेमाल से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात की गति बेहतर होने और टोल प्लाजा पर लगने वाली कतारों में कमी आने की उम्मीद है।
हालांकि, इसके लिए केवल कैमरे और सेंसर लगाना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को विभिन्न श्रेणियों के छूट प्राप्त वाहनों का सटीक डिजिटल डेटाबेस भी तैयार करना होगा।
रक्षा कर्मियों के निजी वाहनों की पहचान इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो नई तकनीक लागू होने के बाद पात्र वाहन चालकों को अनावश्यक चालान और भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी खजाने पर कितना पड़ेगा आर्थिक बोझ?
इस प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू वित्तीय खर्च भी है। यदि बड़ी संख्या में निजी वाहनों को टोल छूट दी जाती है, तो सरकार को इसकी लागत का आकलन करना होगा।
उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए वार्षिक FASTag पास की कीमत 3,075 रुपये बताई गई है। यदि 10 लाख वाहनों के लिए इसी दर से वार्षिक पास का खर्च उठाया जाए, तो यह राशि लगभग 307.5 करोड़ रुपये होगी।
हालांकि, यह केवल उदाहरण के आधार पर किया गया अनुमान है। वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने वाहन योजना के लिए पात्र होंगे और सरकार किस प्रकार की छूट व्यवस्था लागू करेगी।
इसलिए दोनों मंत्रालयों के बीच वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर सहमति बनना भी इस प्रस्ताव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी पर भी रहेगा विशेष ध्यान
सैन्यकर्मियों के वाहनों की डिजिटल पहचान तैयार करते समय सुरक्षा और गोपनीयता को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा। सेना से संबंधित वाहनों की आवाजाही का विवरण संवेदनशील हो सकता है।
ऐसे में प्रस्तावित व्यवस्था में केवल आवश्यक जानकारी तक सीमित पहुंच, सुरक्षित डेटाबेस और अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत होगी।
इसके अलावा फर्जी FASTag, गलत वाहन पंजीकरण और छूट के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी मजबूत तकनीकी प्रणाली विकसित करनी होगी।
सैन्यकर्मियों के लिए कब लागू होगी नई सुविधा?
फिलहाल सैन्यकर्मियों के निजी वाहनों को टोल छूट देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच बातचीत जारी है। विशेष FASTag, वार्षिक पास और डिजिटल पहचान जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है।
अभी तक सरकार की ओर से अंतिम अधिसूचना, आवेदन प्रक्रिया, पात्र वाहनों की संख्या या सुविधा शुरू होने की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो देश के लाखों सक्रिय रक्षा कर्मियों को राजमार्गों पर यात्रा के दौरान बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही भारत की डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को भी अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को कब तक अंतिम रूप देती है और सैन्यकर्मियों को टोल छूट देने के लिए कौन-सा डिजिटल मॉडल अपनाया जाता है।