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दिल्ली में स्मार्ट होगा जल प्रबंधन, प्रवेश साहिब सिंह ने IC³ कमांड सेंटर का उद्घाटन

इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन को बड़ी पाइपलाइनों की मरम्मत के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें हाई-कैपेसिटी सबमर्सिबल डी-वॉटरिंग पंप, 60 kVA का जनरेटर सेट और मरम्मत के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। इसकी मदद से घटनास्थल पर बिजली उपलब्ध न होने की स्थिति में भी जरूरी काम किया जा सकेगा। IC³ सेंटर से GPS के माध्यम से वाहन की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी और जरूरत के अनुसार

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Gauravshali Bharat News
  • October 14, 2026 4:20 pm IST, Published 4 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली में जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में आज दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शिवाजी मार्ग, नई दिल्ली स्थित JWIL Infra Limited के कार्यालय में इंटेलिजेंट कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (IC³) का उद्घाटन किया और एक विशेष इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इन पहलों का उद्देश्य जल आपूर्ति नेटवर्क की बेहतर निगरानी करना, पानी की बर्बादी को कम करना और पाइपलाइन में लीकेज या जल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। IC³ सेंटर पर नेटवर्क की निगरानी, रखरखाव, उपभोक्ताओं की शिकायतों और फील्ड ऑपरेशन से जुड़ी जानकारियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। वहीं, विशेष उपकरणों से लैस इमरजेंसी वाहन की मदद से बड़ी पाइपलाइन में लीकेज होने पर जरूरी उपकरण जुटाने में लगने वाले समय को कम किया जा सकेगा।

इस अवसर पर प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “हमारे लिए जल प्रबंधन का मतलब केवल पानी की आपूर्ति करना नहीं है। पानी की बर्बादी रोकना, समस्याओं का जल्द पता लगाना और पाइपलाइन में लीकेज या किसी अन्य बाधा के कारण लोगों को परेशानी न हो, यह भी उतना ही जरूरी है। तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब उसका असर दिल्ली के लोगों के रोजमर्रा के जीवन में दिखाई दे।”

IC³ प्लेटफॉर्म के माध्यम से SCADA सिस्टम, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS), स्मार्ट मीटर, उपभोक्ता शिकायतों, रखरखाव व्यवस्था और GPS से जुड़े फील्ड वाहनों का डेटा एकीकृत किया जाएगा। इससे अधिकारियों को जल आपूर्ति नेटवर्क की स्थिति पर नजर रखने, संवेदनशील स्थानों की पहचान करने, मरम्मत टीमों की लोकेशन ट्रैक करने और शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा करने में मदद मिलेगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल ट्विन तकनीक के इस्तेमाल से पाइपलाइन फटने की संभावनाओं का पूर्वानुमान लगाने, कम दबाव वाले क्षेत्रों की पहचान करने और पानी की मांग के पैटर्न को समझने में भी सहायता मिलेगी। इससे व्यवस्था को समस्या उत्पन्न होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित समस्याओं की पहले से पहचान करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।

तकनीक के साथ जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, पानी की बर्बादी कम हो, मरम्मत का काम तेजी से हो और जवाबदेही बढ़े। जब कोई शिकायत आती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए और की गई कार्रवाई को ट्रैक किया जा सके। हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जिससे अधिकारी मौके पर बेहतर निर्णय ले सकें और लोगों को बेहतर सेवाएं मिलें।” JWIL वर्तमान में दिल्ली जल बोर्ड की चंद्रावल जल आपूर्ति परियोजना के पैकेज 2, 3 और 4 पर काम कर रही है। इन पैकेजों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में दिल्ली की लगभग 10 प्रतिशत आबादी और भौगोलिक क्षेत्र शामिल हैं। इनमें कई महत्वपूर्ण VIP क्षेत्र भी आते हैं।

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इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन को बड़ी पाइपलाइनों की मरम्मत के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें हाई-कैपेसिटी सबमर्सिबल डी-वॉटरिंग पंप, 60 kVA का जनरेटर सेट और मरम्मत के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। इसकी मदद से घटनास्थल पर बिजली उपलब्ध न होने की स्थिति में भी जरूरी काम किया जा सकेगा। IC³ सेंटर से GPS के माध्यम से वाहन की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी और जरूरत के अनुसार इसे संबंधित स्थान पर भेजने में समन्वय स्थापित होगा।

इस वाहन से मरम्मत कार्य में होने वाली देरी कम करने, जल आपूर्ति बाधित रहने की अवधि घटाने तथा पानी की बर्बादी और सड़कों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह चंद्रावल परियोजना के तीनों पैकेजों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता करेगा।

प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “पानी की किसी बड़ी पाइपलाइन में लीकेज होने पर कुछ मिनट भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। आपात स्थिति आने के बाद उपकरणों की व्यवस्था करने के बजाय, जरूरी उपकरणों का पहले से तैयार रहना समय बचा सकता है और जल आपूर्ति को जल्द बहाल करने में मदद कर सकता है। दिल्ली को ऐसी ही व्यावहारिक और परिणाम देने वाली व्यवस्थाओं की जरूरत है।”

 

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