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यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसा: 9 मौतों के बाद चौंकाने वाला खुलासा

2.65 लाख रुपये के 61 चालान के बावजूद सड़कों पर दौड़ रही थी बस, यात्रियों की चेतावनी अनसुनी करने का आरोप; दो चालक और परिचालक गिरफ्तार।

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  • September 25, 2026 11:01 pm IST, Published 1 hour ago

ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर नौ यात्रियों की जान लेने वाले भीषण बस अग्निकांड की जांच में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। दिल्ली से महोबा जा रही एसी स्लीपर बस में 23 सितंबर की रात लगी आग के बाद अब उसके पुराने चालान, परमिट और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त बस के खिलाफ 61 चालान दर्ज थे, जिनकी कुल राशि लगभग 2.65 लाख रुपये बताई गई है। इसके बावजूद बस का परिचालन जारी था।

बस के खिलाफ 61 चालान, फिर भी जारी रहा परिचालन

हादसे के बाद सामने आए यातायात रिकॉर्ड ने परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में बस पर 19 चालान और लगभग 1.75 लाख रुपये के जुर्माने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद शुक्रवार को प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट में 61 चालान और लगभग 2.65 लाख रुपये के कुल जुर्माने का उल्लेख किया गया।

रिकॉर्ड में तेज रफ्तार, गलत पार्किंग, परमिट संबंधी उल्लंघन, वाहन में बदलाव और कम उम्र के चालक से वाहन चलवाने जैसे मामले शामिल बताए गए हैं। जनवरी 2026 में नाबालिग चालक से संबंधित उल्लंघन पर भी चालान होने की खबर सामने आई है।दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार, बस के खिलाफ राजधानी में नौ चालान दर्ज थे। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल चालान बकाया होने के आधार पर हर मामले में वाहन जब्त करने का प्रावधान नहीं है। गंभीर उल्लंघनों पर अलग कार्रवाई की जा सकती है।

आखिर उस रात बस में क्या हुआ था?

बुधवार, 23 सितंबर की रात बिहार में पंजीकृत बस संख्या BR32PA8647 दिल्ली के कश्मीरी गेट से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी। बस में लगभग 35 यात्री सवार थे। रात करीब 11:30 बजे ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में दयानतपुर गांव के पास यमुना एक्सप्रेसवे के 33वें किलोमीटर पर बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। यात्रियों में अफरातफरी मच गई। कई लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। हादसे में एक महिला सहित नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्री बाहर निकलने में सफल रहे।

यात्रियों ने पहले ही दी थी चेतावनी

हादसे में जीवित बचे यात्रियों की शिकायत ने बस कर्मचारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हमीरपुर निवासी यात्री सुनील कुमार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के अनुसार, बस में जलने की गंध आने पर यात्रियों ने चालक और परिचालक से वाहन रोकने का अनुरोध किया था। आरोप है कि बार-बार कहने के बावजूद बस तत्काल नहीं रोकी गई।

शिकायत में चालक और परिचालक पर यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करने और उनकी चेतावनी को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, गिरफ्तार चालकों ने धूम्रपान करने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस इन दावों की जांच कर रही है।

दो चालक और परिचालक गिरफ्तार

जेवर पुलिस ने हादसे के संबंध में कार्रवाई करते हुए दो चालकों और एक परिचालक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पवन, योगेश दीक्षित और रोहित कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, पवन और योगेश बस के चालक थे, जबकि रोहित परिचालक था। तीनों को 24 सितंबर को साबौता अंडरपास के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

आग लगने की असली वजह क्या थी?

प्रारंभिक जांच में बस के एयर कंडीशनिंग सिस्टम में खराबी या चिंगारी के कारण आग लगने की आशंका जताई गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल में आग लगने के बाद लपटें तेजी से फैल सकती हैं। वहीं, यात्रियों ने बस के भीतर जलने की गंध आने और कर्मचारियों की कथित लापरवाही की शिकायत की है। तकनीकी जांच पूरी होने से पहले आग लगने के किसी एक कारण को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।

मृतकों की पहचान में आ रही परेशानी

शुक्रवार तक सामने आई जानकारी के अनुसार, नौ मृतकों में से छह की पहचान हो चुकी थी। इनमें श्रुति रावत, सरोज गुप्ता, मयंक गुप्ता, देवेंद्र सहाय, हरिशरण गुप्ता और उषा देवी के नाम शामिल हैं।आग की तीव्रता के कारण कुछ शव बुरी तरह झुलस गए, जिससे पहचान में कठिनाई आ रही है। नोएडा के सेक्टर-94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस में मृतकों के परिजन पहचान और आगे की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

हादसे के बाद बस की आपातकालीन निकास व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की स्थिति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। लंबी दूरी की स्लीपर बसों में आग लगने जैसी आपात स्थिति के दौरान यात्रियों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त निकास द्वार और कार्यशील अग्निशमन उपकरण आवश्यक हैं। इस दुर्घटना ने निजी बसों की नियमित फिटनेस जांच, सुरक्षा मानकों और परिवहन नियमों के अनुपालन की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है।

प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि घोषित की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दुर्घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के उपचार और पीड़ित परिवारों की सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

अब जांच के घेरे में बस का संचालन

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगातार यातायात उल्लंघनों का रिकॉर्ड होने के बावजूद बस का संचालन कैसे जारी रहा। बस के पंजीकरण, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और विभिन्न राज्यों से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी भी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों की भूमिका और वाहन के संचालन में नियमों के पालन की स्थिति जांच के महत्वपूर्ण विषय हैं। नौ यात्रियों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के साथ ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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