• होम
  • गुजरात
  • वडोदरा में बारिश के बाद मगरमच्छों का आतंक, रिहायशी इलाकों में दिखने से दहशत

वडोदरा में बारिश के बाद मगरमच्छों का आतंक, रिहायशी इलाकों में दिखने से दहशत

वडोदरा (गुजरात): मानसून की दस्तक के साथ ही गुजरात के वडोदरा शहर में एक बार फिर मगरमच्छों की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण मगरमच्छ शहर के कई रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं। हाल के दिनों में शहर के पश्चिमी […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 10, 2026 2:00 pm IST, Published 1 hour ago

वडोदरा (गुजरात): मानसून की दस्तक के साथ ही गुजरात के वडोदरा शहर में एक बार फिर मगरमच्छों की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण मगरमच्छ शहर के कई रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं। हाल के दिनों में शहर के पश्चिमी हिस्से के टंडलजा गांव, वासना-भायली रोड और आसपास के क्षेत्रों में कई मगरमच्छ देखे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान विश्वामित्री नदी का जलस्तर बढ़ने पर मगरमच्छ अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर आसपास के इलाकों में पहुंच जाते हैं। इस बार भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर मगरमच्छ सड़क किनारे, नालों और पानी से भरे क्षेत्रों में दिखाई दिए, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों में अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ मगरमच्छ काफी बड़े आकार के थे और खुलेआम पानी में तैरते हुए दिखाई दिए। कई लोगों ने इनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। वायरल वीडियो देखने के बाद शहर के अन्य इलाकों के लोग भी सतर्क हो गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मगरमच्छ सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करते, लेकिन यदि उन्हें खतरा महसूस हो या कोई व्यक्ति उनके बहुत करीब पहुंच जाए तो वे आक्रामक हो सकते हैं। इसलिए ऐसे समय में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें विभिन्न क्षेत्रों से मगरमच्छ दिखने की सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। विभाग की रेस्क्यू टीमें अलर्ट मोड पर हैं और जहां भी मगरमच्छ की सूचना मिलती है, वहां तत्काल पहुंचकर उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि मगरमच्छ दिखाई देने पर स्वयं उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।

प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों, नदी किनारों और बड़े नालों के पास जाने से बचें। बच्चों को अकेले बाहर न भेजें तथा पालतू जानवरों को भी पानी के किनारे न छोड़ें। रात के समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि इस दौरान मगरमच्छ अधिक सक्रिय रहते हैं।

वडोदरा की विश्वामित्री नदी मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध मानी जाती है। वर्षों से यहां बड़ी संख्या में मगरमच्छ पाए जाते हैं। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर कई मगरमच्छ आसपास के इलाकों में पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष ऐसी घटनाएं सामने आती हैं और प्रशासन को विशेष निगरानी करनी पड़ती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मगरमच्छों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को संभावित खतरे से बचाया जा सकता है। कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने की मांग की है ताकि हर वर्ष लोगों को इस समस्या का सामना न करना पड़े।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मगरमच्छ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उन्हें नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है। यदि किसी क्षेत्र में मगरमच्छ दिखाई दे तो घबराने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। इससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि वन्यजीवों का भी संरक्षण हो सकेगा।

फिलहाल प्रशासन और वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। रेस्क्यू टीमें विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं और नागरिकों से सहयोग की अपील की जा रही है। मानसून के पूरे मौसम में ऐसी घटनाएं बढ़ने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और समय पर सूचना देकर किसी भी बड़ी दुर्घटना को टाला जा सकता है।

वडोदरा में मगरमच्छों की बढ़ती मौजूदगी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते दबाव के बीच इंसानों और वन्यजीवों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। आने वाले दिनों में प्रशासन की सक्रियता और नागरिकों की जागरूकता ही इस चुनौती से निपटने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Advertisement