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अमरनाथ यात्रा 2026: इस साल भी नहीं मिलेगी हेलीकॉप्टर सेवा, पूरा मार्ग रहेगा ‘नो-फ्लाइंग जोन’

श्रीनगर: आगामी श्री अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद अहम फैसला लिया है। इस साल भी पवित्र गुफा की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ नहीं मिल सकेगा। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकार ने पूरे यात्रा […]

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  • June 4, 2026 9:59 am IST, Published 2 hours ago

श्रीनगर: आगामी श्री अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद अहम फैसला लिया है। इस साल भी पवित्र गुफा की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ नहीं मिल सकेगा। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकार ने पूरे यात्रा मार्ग को पूरी तरह से ‘नो-फ्लाइंग जोन’ (No-Fly Zone) घोषित कर दिया है।

यह लगातार दूसरा साल है जब सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर अमरनाथ यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं को पूरी तरह निलंबित रखा गया है।

1 जुलाई से लागू होंगे कड़े नियम, दोनों मुख्य रूट प्रभावित

जम्मू-कश्मीर सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (Order No. 321–HOME of 2026) के मुताबिक, यात्रा के दोनों मुख्य मार्ग— पहलगाम (Pahalgam Axis) और बालटाल (Baltal Axis) को आगामी 1 जुलाई, 2026 से लेकर यात्रा के संपन्न होने तक ‘नो-फ्लाइंग जोन’ के दायरे में रखा जाएगा।

इस पाबंदी का मुख्य उद्देश्य अनधिकृत हवाई गतिविधियों, जैसे कि अज्ञात ड्रोन्स या अन्य फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स को यात्रा क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकना और हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाना है।

श्रद्धालुओं के लिए क्या हैं विकल्प?

हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध न होने के कारण श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों को पहले से ही अपनी तैयारी रखने की सलाह दी है। श्रद्धालु पवित्र गुफा तक पहुँचने के लिए केवल पारंपरिक माध्यमों का ही उपयोग कर सकेंगे:

  1. पैदल यात्रा (Trekking): अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार निर्धारित ट्रैक से यात्रा।

  2. पालकी (Palanquins): बुजुर्गों और शारीरिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए।

  3. घोड़े/खच्चर (Ponies): चढ़ाई को आसान बनाने के लिए स्थानीय खच्चर सेवा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: 670 पैरामिलिट्री कंपनियां संभालेंगी मोर्चा

अमरनाथ यात्रा को हमेशा से आतंकियों की हिट-लिस्ट में माना जाता रहा है, विशेषकर पिछले वर्ष (2025) पहलगाम के पास हुए आतंकी हमले के बाद से सुरक्षा ग्रिड को कई गुना मजबूत कर दिया गया है। इस साल की सुरक्षा व्यवस्था पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक चाक-चौबंद है:

  • अतिरिक्त फोर्स की तैनाती: इस बार सुरक्षा के लिए 670 अर्धसैनिक कंपनियों (Paramilitary Companies) को तैनात किया जा रहा है, जो पिछले साल की तुलना में 89 कंपनियां अधिक हैं।

  • हाई-टेक निगरानी: पूरे 57 दिनों की इस यात्रा के दौरान दोनों रूटों की चौबीसों घंटे (24×7) एंटी-ड्रोन तकनीक, सीसीटीवी (CCTV), और एडवांस्ड एरियल सर्विलांस के जरिए हवाई व जमीनी निगरानी की जाएगी।

  • सुरक्षित काफिला: सीआरपीएफ (CRPF) के सशस्त्र कमांडो हर सुबह जम्मू के यात्री निवास से बालटाल और पहलगाम के लिए निकलने वाले तीर्थयात्रियों के काफिले को एस्कॉर्ट करेंगे। 250 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 44) पर भी सुरक्षा बल लगातार तैनात रहेंगे।

यात्रा का शेड्यूल: बता दें कि इस साल की 57 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई, 2026 से शुरू होकर रक्षाबंधन के दिन यानी 28 अगस्त, 2026 को संपन्न होगी। अब तक 3.6 लाख से अधिक श्रद्धालु अपना पंजीकरण करवा चुके हैं।

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