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फर्जी दस्तावेजों से भारतीय पासपोर्ट बनवाने का मामला, 31 पासपोर्ट निरस्त

66 आरोपित अब भी फरार ग्वालियर। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट विभाग ने अब तक 70 पासपोर्ट में से 31 निरस्त कर दिए हैं। इनमें […]

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Gauravshali Bharat News
  • November 7, 2026 10:12 am IST, Published 8 hours ago

66 आरोपित अब भी फरार

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट विभाग ने अब तक 70 पासपोर्ट में से 31 निरस्त कर दिए हैं। इनमें 17 पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र के सिमरिया गांव के पते पर बनाए गए थे। बाकी पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी जारी है। इस मामले में 66 आरोपित अब भी फरार बताए जा रहे हैं।

जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने अपनी असली पहचान छिपाकर नाम और पते बदल लिए थे। इसके बाद भारतीय नागरिक होने के फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और उनके आधार पर पासपोर्ट हासिल कर लिए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आई है, जिसने बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

बौद्ध मठों के पते पर बनवाए गए पासपोर्ट

एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क ने बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने के लिए बौद्ध मठों के पतों का भी इस्तेमाल किया था। आरोपितों ने इन पतों के आधार पर भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए और पासपोर्ट प्रक्रिया पूरी कराई।

इस मामले के कथित मुख्य सरगना रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु और उसके तीन बांग्लादेशी साथियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके अलावा स्थानीय स्तर पर मदद करने के आरोप में गुलाबराय गौतम, गयाप्रसाद गौतम और भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र के एजेंट नसीम अख्तर को भी गिरफ्तार किया गया है।

विदेशों में छिपे होने की आशंका

जांच एजेंसियों के सामने फरार आरोपितों को लेकर कई अहम जानकारियां आई हैं। एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कुछ आरोपितों के इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार और चीन जैसे देशों में छिपे होने की जानकारी मिली है।

एजेंसियां अब इन आरोपितों की पहचान, उनके संपर्कों और विदेश जाने के रास्तों की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के लिए किन लोगों ने दस्तावेज उपलब्ध कराए और सरकारी प्रक्रिया में किस स्तर पर मदद की गई।

नागपुर के फर्जी पासपोर्ट गिरोह से भी जुड़ रहीं कड़ियां

इस मामले की जांच का दायरा अब मध्य प्रदेश से बाहर महाराष्ट्र तक पहुंच गया है। नागपुर में भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया था। एसटीएफ अब ग्वालियर-डबरा और नागपुर में पकड़े गए फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि दोनों मामलों में दस्तावेज तैयार कराने, पहचान छिपाने और पासपोर्ट बनवाने के तरीकों में समानता हो सकती है। हालांकि, इनके बीच सीधे संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पासपोर्ट व्यवस्था की निगरानी पर उठे सवाल

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने का मामला दस्तावेज सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पासपोर्ट किसी भी नागरिक की अंतरराष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। ऐसे में इसकी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर हो सकती है।

फिलहाल एसटीएफ फरार आरोपितों की तलाश, बाकी पासपोर्ट निरस्त कराने और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। जांच का अगला महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना है कि इस गिरोह ने कितने लोगों को फर्जी भारतीय पहचान दिलाई और इसमें किन-किन स्तरों पर मदद मिली।

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