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7 साल में 274 भगोड़े भारत लाए गए

36 देशों से हुआ प्रत्यर्पण: सरकार नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने दावा किया है कि पिछले सात वर्षों में भारत ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक यह उपलब्धि हासिल की गई, जो 2004-2013 […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 5, 2026 3:38 am IST, Published 20 seconds ago

36 देशों से हुआ प्रत्यर्पण: सरकार

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने दावा किया है कि पिछले सात वर्षों में भारत ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक यह उपलब्धि हासिल की गई, जो 2004-2013 के दौरान होने वाले औसत वार्षिक प्रत्यर्पण की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। इसी अवधि में ₹17,874 करोड़ की संपत्ति भी अटैच की गई है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, भारत वापस लाए गए 274 भगोड़ों में 9 आर्थिक अपराधी, 17 आतंकवाद से जुड़े आरोपी, 42 संगठित अपराधी, 62 हत्या, लूट और हिंसक अपराधों के आरोपी, 53 यौन अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के आरोपी, 16 मादक पदार्थों की तस्करी, 12 नकली मुद्रा तस्करी, 18 मानव तस्करी तथा 45 अन्य मामलों में वांछित अपराधी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने बताया कि हाल के वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए हैं।

सरकार के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में अब प्रत्यर्पण अनुरोधों को संबंधित देशों की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जा रहा है। आवश्यक दस्तावेज और लिखित आश्वासन समय पर उपलब्ध कराए जाने से प्रत्यर्पण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।

गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2018 में लागू Fugitive Economic Offenders Act तथा 2019 में NIA और UAPA में किए गए संशोधनों से भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिली। वहीं, 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों के तहत BNSS की धारा 355 और 356 में पहली बार भगोड़े आरोपियों के खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने का प्रावधान किया गया है।

सरकार ने जानकारी दी कि CBI ने स्पेशल ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर की स्थापना की है और राज्यों व केंद्रीय एजेंसियों में इंटरपोल कॉन्टैक्ट ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। ऑपरेशन त्रिशूल के तहत इंटरपोल के सहयोग से सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट और प्रोफाइल मैपिंग के जरिए विदेशों में छिपे भगोड़ों का पता लगाया जा रहा है। कई मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया भी तेज की गई है।

उल्लेखनीय है कि 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य षड्यंत्रकारी तहव्वुर राणा को 10 अप्रैल 2025 को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। वहीं, सरकार ने कहा कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भी भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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