• होम
  • देश
  • ‘CBSE के जेबकतरों से सावधान…’

‘CBSE के जेबकतरों से सावधान…’

री-इवैल्यूएशन फीस पर बरसे राहुल गांधी, कहा- बोर्ड की गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं? नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की आंसर-शीट चेकिंग और री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और बोर्ड पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सरकार […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 1, 2026 11:32 am IST, Published 15 seconds ago

री-इवैल्यूएशन फीस पर बरसे राहुल गांधी, कहा- बोर्ड की गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं?

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की आंसर-शीट चेकिंग और री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और बोर्ड पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सरकार पर शिक्षा को व्यापार बनाने का आरोप लगाते हुए छात्रों से ‘CBSE के जेबकतरों से सावधान’ रहने की अपील की है। उन्होंने साफ कहा कि गलती बोर्ड के कॉपियां जांचने वालों की होती है, लेकिन उसकी आर्थिक कीमत छात्रों और उनके परिवारों को चुकानी पड़ती है।

“गलती CBSE की, कमाई सरकार की”

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए इस पूरी प्रक्रिया के गणित को सामने रखा। उन्होंने लिखा कि छात्रों को अपनी ही कॉपियों की सही जांच करवाने के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है।

राहुल गांधी ने फीस का ब्योरा देते हुए बताया:

  • डिजिटल स्कैन कॉपी: अपनी ही आंसर-शीट की डिजिटल स्कैन कॉपी पाने के लिए छात्रों को ₹100 प्रति विषय देने होते हैं।

  • री-टोटलिंग (अंकों की दोबारा गिनती): इसके लिए ₹100 प्रति पेपर का शुल्क तय है।

  • री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन): किसी सवाल के मूल्यांकन को चुनौती देने के लिए ₹25 प्रति सवाल फीस ली जाती है।

राहुल गांधी का बड़ा दावा: “अपनी ही आंसर-शीट की सही जांच के लिए एक छात्र को ₹2000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। जब करीब 4 लाख छात्रों ने इस तरह के आवेदन दिए हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि CBSE इस प्रक्रिया से कितनी भारी कमाई कर रहा है। गलती बोर्ड की है, लेकिन कमाई सरकार की हो रही है।”

शिक्षा को सेवा की जगह कारोबार बना दिया

राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि जब शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया जाता है, तो उसमें सुधार की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

उन्होंने लिखा:

“जब शिक्षा को एक सेवा की जगह कारोबार (बिजनेस) बना दिया जाता है, तब गलतियां सुधारी नहीं जातीं बल्कि उन्हें कमाई का जरिया बना लिया जाता है। इसकी सबसे बड़ी और भारी कीमत हमारे देश के बच्चों को अपने कीमती समय, आत्मविश्वास और अपने भविष्य को दांव पर लगाकर चुकानी पड़ रही है।”

कॉपियां जांचने के तरीके पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कॉपियों को ठीक से न जांचे जाने के कारण ही छात्रों को री-इवैल्यूएशन का सहारा लेना पड़ता है। कॉपियां जांचने वालों की लापरवाही के कारण बच्चों के नंबर गलत आते हैं, जिससे उनका मानसिक तनाव बढ़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि री-इवैल्यूएशन की इस व्यवस्था को सुधारा जाए और छात्रों पर से इस नाजायज फीस का बोझ तुरंत हटाया जाए। इस बयान के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में सीबीएसई की फीस संरचना को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

Advertisement