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देशभर के शहरों में ‘कैच द रेन’ मिशन तेज, जल संकट से निपटने की बड़ी तैयारी

नई दिल्ली: देश के शहरों को भविष्य के जल संकट से सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने वर्षा जल संरक्षण अभियान को और तेज कर दिया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) अमृत 2.0 मिशन के तहत देशभर में ‘कैच द रेन – जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो’ अभियान को व्यापक […]

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  • July 14, 2026 1:15 pm IST, Published 44 minutes ago

नई दिल्ली: देश के शहरों को भविष्य के जल संकट से सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने वर्षा जल संरक्षण अभियान को और तेज कर दिया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) अमृत 2.0 मिशन के तहत देशभर में ‘कैच द रेन – जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो’ अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य केवल बारिश के पानी का संग्रह करना नहीं, बल्कि भूजल स्तर को सुधारना, सूखते जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और शहरों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम बनाना भी है।

सरकार के अनुसार इस अभियान में देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 900 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। शहरों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसून के दौरान गिरने वाला पानी व्यर्थ बहने के बजाय भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

जल शक्ति अभियान–जन भागीदारी 2.0 के अंतर्गत जल शक्ति मंत्रालय और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय मिलकर विभिन्न शहरों में भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कर रहे हैं। 79 नगर निगमों में लगभग दो लाख भूजल पुनर्भरण संरचनाओं पर काम शुरू किया जा चुका है, जबकि 738 अन्य शहरी निकायों में 73 हजार से अधिक संरचनाओं का निर्माण और विकास जारी है। इन प्रयासों से शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर को स्थिर रखने और जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अमृत 2.0 के तहत उथले जलभृत प्रबंधन (Shallow Aquifer Management) कार्यक्रम भी तेजी से लागू किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से जलभृतों का अध्ययन कर उन क्षेत्रों में विशेष हस्तक्षेप किए जा रहे हैं, जहां भूजल पुनर्भरण की अधिक आवश्यकता है। पश्चिम बंगाल के बर्दवान और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में इंजेक्शन बोरवेल आधारित रिचार्ज पिट बनाए गए हैं, जिनके जरिए वर्षा का पानी सीधे गहरे भूजल स्तर तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में छतों पर आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की गई है, जिससे संग्रहित पानी का उपयोग भी हो रहा है और भूजल भी रिचार्ज हो रहा है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा और तेलंगाना के वारंगल जैसे शहरों में मानसून शुरू होने से पहले ही रिचार्ज संरचनाओं को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि पहली ही बारिश से अधिकतम जल संग्रह किया जा सके। यह रणनीति आने वाले समय में जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अभियान का एक बड़ा हिस्सा जल निकायों के पुनर्जीवन पर भी केंद्रित है। अमृत 2.0 के अंतर्गत लगभग 1.21 लाख एकड़ क्षेत्र में फैले तालाबों, झीलों और अन्य जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं में गाद हटाना, जल प्रवाह के रास्तों में सुधार, तटों को मजबूत करना, हरित विकास और जैव विविधता को बढ़ावा देना शामिल है। इससे न केवल जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी बल्कि शहरी बाढ़ जैसी समस्याओं से निपटने में भी सहायता मिलेगी।

इसके साथ ही देशभर में लगभग 12,750 एकड़ हरित क्षेत्रों और पार्कों को विकसित एवं सुदृढ़ किया जा रहा है। ये हरित क्षेत्र भूजल पुनर्भरण में मदद करेंगे, शहरी तापमान को नियंत्रित करेंगे और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराएंगे। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल भविष्य के टिकाऊ शहरों की नींव साबित हो सकता है।

सरकार का मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। यदि हर घर, हर संस्था और हर शहर वर्षा जल संचयन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ‘कैच द रेन’ अभियान इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है कि आज बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल का आधार बने। जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के माध्यम से भारत अपने शहरों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और जल-संपन्न बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है।

 

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